सफाई कर्मी हड़ताल पर, वार्ड सदस्य ठोक रहे ताल
नवरात्र के पवित्र दिनों और मोहर्रम से पहले जहां शहर में सफाई व्यवस्था ठीक होनी चाहिए थी। वहां, सफाईकर्मी हड़ताल पर डटे हैं और नगर पालिका बोर्ड सियासत में उलझा हुआ है। आम जनमानस को खासी परेशानी हो रही है, इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। नवरात्र के दिनों में मंदिरों में जाने वाले भक्तों को शहर में फैले गंदगी के साम्राज्य से गुजरकर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन भी चुप्पी साधे हुए बैठा है, जिससे पब्लिक का गुस्सा कभी भी फूट सकता है।
शहर भर में गंदगी, कूड़े के ढेर हर गली, कूंचे, मोहल्ले, तिराहे और चौराहे पर नजर आ रहे हैं, जबकि पवित्र नवरात्र के दौरान लोगों में साफ-सफाई की खासी चाह होती है। वहीं, सफाईकर्मियों ने भी दबाव बनाने के लिए नवरात्र में धरने देने का तय किया। यही नहीं, अब तक सभी प्रस्तावों पर शांतिपूर्वक मूकदर्शक बनकर हरी झंडी दिखाने वाला पालिका बोर्ड भी छिन्न-भिन्न हो गया है। इसमें कुछ तो परिस्थितियों पर आधारित समस्याएं हैं, जबकि शेष सबकुछ प्लान किया हुआ नजर आ रहा है, जिससे आम जनता को परेशान करने के साथ ही चुनावी माहौल बनाया जा सके। भविष्य में क्या होगा, इस बारे में अभी कहना जल्दबाजी होगी, फिलहाल यह चुनावी तैयारियां ही नजर आ रही हैं।
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‘तानाशाह’ के निकाले जा रहे निहितार्थ
बदायूं। इस सियासी संग्राम में एक शब्द का दोनों पक्षों ने प्रयोग किया है वो है ‘तानाशाह’ हर में हुए बवाल के बाद सदर विधायक आबिद रजा ने कहा था कि पब्लिक के हित के लिए लड़ाई करने पर उन्हें तानाशाह कहा जाता है, तो वो तानाशाह बनने के लिए तैयार हैं। इसके बाद नगर पालिका की बोर्ड बैठक का बहिष्कार करने वाले वार्ड मेंबरों ने विधायक आबिद रजा की पत्नी चेयरपर्सन फात्मा रजा के लिए तानाशाह शब्द का प्रयोग किया है। यहां पर दोनों ही पक्षों के तानाशाह शब्द प्रयोग किए जाने से कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।