बदायूं। बंदरों के हमलों से लोगों को सुरक्षा देने के लिए नगर निकायों के पास कोई प्लान नहीं है। नगर निकाय बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़े जाने के लिए बजट न होने का हवाला देकर आमजन को सुरक्षित माहौल देने में फेल साबित हो रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि बच्चों व बुजुर्गाें ने छतों पर जाना ही छोड़ दिया है। मजबूरी में लोग छतों पर डंडा लेकर जाते हैं। वहीं वन विभाग और नगर निकाय के अधिकारी एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंक पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
शनिवार को इस्लामनगर थाना क्षेत्र के फिरोजपुर गवराह में बंदर से चप्पल छुड़ाने के प्रयास के दौरान 15 साल के कक्षा नौ के छात्र अंश राघव की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया। हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा है कि आखिरकार नगर निकाय भारी भरकम बजट मिलने के बावजूद आमजन को बंदरों से सुरक्षा क्यों नहीं दे पा रहा है। वन विभाग, प्रशासन और नगर निकायों के अधिकारी, क्षेत्रीय विधायक या सांसद मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन उन मांओं व उन महिलाओं का दर्द समझने की कोशिश नहीं करते, जिन्होंने बंदरों के हमले में बेटा या पति खोया है।
इस्लामगनर, बिल्सी और वजीरगंज क्षेत्रों में हाल ही में बंदरों के हमले से हुईं ताबड़तोड़ घटनाओं में कई की जान चली गई। जिले में सात नगर पालिका और 14 नगर पंचायतें हैं। एक भी नगर निकाय ऐसा नहीं, जहां बंदरों का भय न हो। नगर निकाय बजट का रोना रोकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
उझानी के गांव बसोमा निवासी उमेश ने बताया कि उसके पिता महावीर मौर्य (65) पर 6 सितंबर को बंदरों ने छत पर हमला किया था। छत से गिरने के दौरान घायल हुए पिता की मौत हो गई, पोस्टमॉर्टम नहीं कराया था। उन्होंने कहा, किस पर कार्रवाई करते, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की।
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प्रमुख घटनाएं
- नौ मई को रायपुर बुजुर्ग गांव में 17 वर्षीय इंटर की छात्रा राधा शाक्य पुत्री नेमचंद्र को बंदरों ने दौड़ा लिया था। बचने के प्रयास में छत से गिरने से उसकी मौत हो गई।
- 11 अगस्त को गुधनी गांव में 31 वर्षीय रानी पर बंदरों के झुंड ने हमला कर कई जगह काट लिया। उपचार के दौरान 28 अगस्त को उसकी मौत हो गई।
- 31 अगस्त की रात कुंदावली गांव में 42 वर्षीय सरबजीत बंदरों के हमले के बाद छत से गिरकर गंभीर घायल हो गए। बाद में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
- 6 सितंबर को उझानी के गांव बसोमा निवासी महावीर मौर्य (65) पर छत पर बंदरों ने हमला कर दिया था। वह छत से गिरने के दौरान घायल हुए और राजकीय मेडिकल कॉलेज ले जाते समय मौत हो गई थी।
- 16 सितंबर को दिधौनी गांव में 74 वर्षीय राजेंद्र पाल को बंदरों के झुंड ने धक्का दे दिया। सीढ़ियों से आंगन में गिरने के दौरान गंभीर चोटें आने पर उपचार के दौरान मौत हो गई।
- 18 सितंबर की शाम वजीरगंज के गांव पलई में बंदरों के हमले में छत से गिरने की वजह से बताशो देवी पत्नी राजपाल की मौत हो गई।
- अगस्त में उघैती में शर्की पट्टी गांव के बंदर भगाने के प्रयास में छत से गिरकर 80 साल के रघुवीर की मौत हो गई थी।
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छत से गिरने की घटनाएं बढ़ा रहीं चिंता
बिल्सी। दिधौनी गांव निवासी नेकराम ने बताया कि बंदरों का आतंक काफी बढ़ गया है, अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों ने बंदरों को पकड़कर जंगल क्षेत्र में छोड़ने की प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। इधर, सीएचसी बिल्सी के प्रभारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में रोजाना सौ से अधिक एआरवी लगाई जा रही थीं, जिनमें 50 से अधिक मामले बंदर के काटने के होते है। संवाद
आसफपुर क्षेत्र में बंदरों का आतंक
आसफपुर। क्षेत्र के अधिकांश गांवों में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आए दिन आम आदमी के घायल होने की खबर आती हैं। एंटी रेबीज वैक्सीन की जरूरत पहले कुत्तों के काटने पर ही पड़ती थी। बंदरों के काटने पर वैक्सीन अस्पतालों में भी कम पड़ जाती है। हालात, इस कदर खराब हो गए हैं कि बच्चों से ही नही, बड़ों से भी यह खाने-पीने की चीजें जबर्दस्ती छीन लेते हैं। सड़कों पर झुंड के झुंड रहने से आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बनते है। संवाद
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नगर निकायों को बंदरों को पकड़ने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही बड़ी नगर पालिका व पंचायतों में कपि वन तैयार कराए जा रहे हैं, ताकि बंदरों को पकड़कर उनमें छोड़ा जा सके। उझानी में कपि वन तैयार हो चुका है। - अवनीश राय, डीएम बदायूं
बंदरों के हमलों में लोगों की मौतें होना चिंता का विषय है। इस्लामनगर के फिरोजपुर में बच्चे के साथ हुई घटना की जानकारी मिली है। बदायूं के अधिकारियों से बात करेंगे और नगर निकायों के जरिए बंदरों को पकड़वाने के संबंध में प्रयास कराए जाएंगे। - डॉ अरुण कुमार, प्रभारी मंत्री, बदायूं