गतवर्ष 112.5 प्रतिशत जो इस बार कुल 27.9 प्रतिशत रही गेहूं खरीद
15 दिन खरीद का समय बढ़ाना भी काम नहीं आ सका खरीद बढ़ाने में
इस साल गेहूं खरीद को ढाई महीना की जगह तीन महीना का समय दे दिया गया था। बावजूद इसके गेहूं खरीद जितनी कम हुई उतनी कम पिछले इतिहास में कभी नहीं हुई। इस साल गेहूं खरीद केवल 27.9 प्रतिशत में ही सिमटकर रह गई। जबकि गत वर्ष जब गेहूं की फसल को मौसम की मार ने बिछा दिया था। उस समय खरीद लक्ष्य के ऊपर 112.5 प्रतिशत सबसे अधिक थी और इससे सबसे अधिक खरीद का रिकार्ड तोड़ा था।
गेहूं खरीद बढ़ाने के लिए कौन-कौन से जतन नहीं किए गए। लेकिन कोई काम नहीं आया। खरीद के लिए संस्थाएं बढ़ाई गईं। 15 दिन का समय बढ़ाया गया लेकिन खरीद लक्ष्य से इतनी कम स्तर पर रही कि अबतक की खरीद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। गत वर्ष जिले को खरीद का 82 हजार मीट्रिक टन लक्ष्य मिला था। जिसे ढाई महीने से पहले ही पूरा कर लिया गया। खरीद लक्ष्य के सापेक्ष जिले की एजेंसियों ने 92,277.5 मीट्रिक टन गेहूं खरीद कर पिछले रिकार्ड ध्वस्त कर दिए थे। जबकि इस वर्ष 1.33 लाख मीट्रिक टन के विपरीत कुल 37,117.4 एमटी खरीद ही हो सकी।
इस बार मार्केटिंग विभाग ने जिले की लाज रखी और सबसे अधिक 14,856.8 एमटी खरीद कर डाली। नेकफ सबसे कम 25 एमटी ही खरीद कर सकी। हालांकि पीसीएफ 11,837 एमटी, यूपीएफएस ने 3505.3 एमटी, यूपी एग्रो ने 4015.2 एमटी ने खरीद कर कुछ लाज बचाई।
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गत वर्ष अधिक खरीद तो इस बार कम खरीद का रिकार्ड टूटा
जिले का खरीद का रिकार्ड देखा जाए तो गत वर्ष की खरीद ने पिछले सारे रिकार्ड तोड़कर सबसे अधिक 112.5 प्रतिशत खरीद का रिकार्ड बनाया तो इस साल पिछले वर्षों से सबसे कम खरीद का रिकार्ड बना। इस वर्ष खरीद का केवल 27.9 प्रतिशत ही लक्ष्य हासिल हो सका।
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समर्थन मूल्य से अधिक कीमत बाजार में मिलने के बाद सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं आना बंद हो गया। इसलिए खरीद कम रह गई। सरकार की खरीद की मंशा भी यही होती है कि किसान को अपनी फसल का बाजिव मूृल्य मिले। हुआ भी यही, किसान को बाजार में सही मूल्य मिल गया।
- राजेंद्र प्रसाद यादव, एडीएम वित्त/खरीद प्रभारी