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Budaun News: कोहरे के कारण आलू की पौध पर मोजेक वायरस का हमला

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उझानी में खेत में खड़ी आलू की फसल। संवाद
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उझानी। घने कोहरे की वजह से सब्जी वाली फसलों पर वायरस जनित बीमारियां फैलने का अंदेशा बढ़ गया है। आलू पर कोहरे के कारण मोजेक वायरस का खतरा मंडरा रहा है तो वहीं मिर्च और शिमला मिर्च पर चिली कर्ल वायरस का।
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कोहरे से सबसे ज्यादा नुकसान आलू की फसल को होने का अंदेशा है। आलू पर पहले से ही झुलसा की मार लग चुकी है। अब कोहरे में पत्तियां छोटी और पीली पड़ने के साथ कमजोर होने लगीं हैं। ये प्रमुख लक्षण मोजेक वायरस के हैं। मोजेक के अटैक से आलू के पौधों में सिकुड़न शुरू हो जाती है, जो सीधे तौर पर पैदावार प्रभावित करती है।

खतरा तो मटर और दलहन में मसूर को भी है, लेकिन उससे ज्यादा खतरा मिर्च और शिमला मिर्च को है। कोहरे के कारण दोनों ही फसलें चिली कर्ल वायरस की चपेट में आ सकती हैं। चिली कर्ल भी मिर्च और शिमला मिर्च के पौधों को कमजोर कर देता है। शुरू में पौधा पीला तो दिखेगा, लेकिन बाद में वह गिर पड़ेगा।
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मोजेक और चिली कर्ल वायरस से बचाव के देसी तरीके पर गौर करें तो समय रहते फसलों की हल्की सिंचाई करके वायरस का अटैक कम किया जा सकता है। खेत में नमी रहने से कोहरा ज्यादा असरदार साबित नहीं होता। आलू की फसल के आसपास धुआं कर देने से पत्तियों पर कोहरे की मारक क्षमता कम हो जाती है।



गेहूं को पहले बारिश से मिली राहत... अब कोहरे से फायदा

आलू और शिमला मिर्च की फसल को जहां कोहरे से नुकसान है तो वहीं गेहूं की फसल के लिए कोहरा मुफीद है। कल्ले फूटने के बाद गेहूं के पौधे बढ़वार की ओर हैं। तीन दिन पहले बारिश होने से गेहूं को राहत मिल गई थी। फसल में एक बार की सिंचाई भी बच गई है। किसान हरीओम ने बताया कि बढ़वार के दिनों में गेहूं के पौधों को कोहरा फायदेमंद साबित होता है। इस दौरान अगर कोहरा नहीं पड़े तो गेहूं की पैदावार में 20 फीसदी तक गिरावट रहती है।



कोहरे ने आलू की फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। मोजेक वायरस जनित बीमारी की चपेट में आने से आलू को बचाने के लिए किसानों को खेत में हल्की सिंचाई जरूर करनी चाहिए। इन दिनों नरम पौधों की जो फसलें हैं, वह कोहरे से नुकसान में रहेंगी। गेहूं को कोई नुकसान नहीं, बल्कि फायदा है।- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक

उझानी में खेत में खड़ी आलू की फसल। संवाद

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