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युवाओं की मोबाइल की लत से परेशान परिवार वाले डॉक्टरों की शरण में

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बदायूं। युवा पीढ़ी में मोबाइल की लत बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि वे बार-बार अपना मोबाइल चेक करते हैं। मोबाइल बंद होने या भूल जाने पर परेशान हो जाते हैं। और तो और मोबाइल छीनने पर गुस्सा हो जाते हैं। अब इस लत को छुड़ाने के लिए जिला अस्पताल के मन कक्ष में काउंसिलिंग हो रही है। कई अभिभावक यहां बच्चों को लेकर पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल की ओपीडी स्थित मन कक्ष में वैसे तो मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों की काउंसिलिंग की जाती है। यहां ऐसे तमाम लोग आते हैं, जिन्हें या तो मानसिक बीमारी है या फिर कोई ऐसी आदत पड़ गई है, जिससे परिवार वालों के अलावा आसपास के लोग परेशान हैं। लेकिन इस समय मन कक्ष में उन लोगों की काउंसिलिंग हो रही है जिनको ‘मोबाइल की लत’ पड़ गई है। स्थिति यह है कि रोज ही दो-चार लोग अपने बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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ऐसे छुड़ाएं ‘मोबाइल की लत’
1. आप जिस जेब में मोबाइल रखते हैं। कुछ दिन के लिए उसकी जगह बदल दें। इससे मोबाइल तुरंत हाथों में न आए।
2. नोटिफिकेशन बंद कर दें, इससे बार-बार मोबाइल छूने की आदत छूटेगी।
3. कुछ घंटे के लिए इंटरनेट बंद रखें।
4. मोबाइल देखने का समय तय करें, अपना मन दूसरे कार्यों में लगाएं।
5. सुबह उठते ही कुछ घंटे मोबाइल न देखें, सोने से कुछ घंटे पहले भी मोबाइल से दूर रहें।
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क्या कहते हैं अभिभावक
मोबाइल जितना जरूरी है, उससे कहीं ज्यादा नुकसानदायक है। इससे समय बर्बाद होता है। मोबाइल का उपयोग कम से कम होना चाहिए। जब कॉल आए या फोन करना हो। तभी मोबाइल को अपने हाथ में लें।
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- शिशुपाल सिंह, आवास विकास कॉलोनी
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मोबाइल का असर बच्चों पर ज्यादा हो रहा है। वे कुछ नहीं तो कार्टून ही देखते रहते हैं। जरूरी है कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखा जाए। जब उनके लिए अति आवश्यक हो तभी मोबाइल दें।
- प्रदीप भदौरिया, जवाहरपुरी
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मोबाइल की आदत डालने में कहीं न कहीं अभिभावक ही जिम्मेदार हैं। वह लाड़ प्यार में अपने बच्चों को मोबाइल दे देते हैं। जिसका असर बाद में देखने को मिलता है। ऐसे में छोटे बच्चों को मोबाइल देने से बचें।
- नंदकिशोर, ब्राहमपुर
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मोबाइल में फालतू एप नहीं होने चाहिए। जितने ज्यादा एप होते हैं, लोग उतने ही ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं। फिर वह एक-एक करके एप देखने में लगे रहते हैं। कुछ नहीं तो फेसबुक या व्हाट्सएप पर लगे रहते हैं। जबकि यह सूचना आदान प्रदान करने का एक जरिया भर है।
- गौतम, सिविल लाइन
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मोबाइल की लत एक बीमारी की तरह है। ऐसे में बार-बार मोबाइल की ओर ध्यान जाता है। हाथों में मोबाइल ले लेते हैं और उसे चलाते रहते हैं। इसकी आदत बच्चों पर बुरा असर डाल रही है। आदत छुुड़ानी है तो बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। कुछ बातें हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। तभी इसकी आदत से पीछा छुड़ा सकते हैं।
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- डॉ. सर्वेश कुमारी, मानसिक रोग सलाहकार, मन कक्ष
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