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मनरेगा मजदूर तो तैयार, पर मिल नहीं पा रहा काम

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बदायूं। लॉकडाउन के बाद जनपद में फिर से काम शुरू होने लगे हैं। यह कार्य मनरेगा मजदूरों से कराया जाना है। सरकारी आंकड़ों यह दावा करते हैं कि अधिकांश श्रमिकों को काम दिया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जॉब कार्ड धारकों का कहना है कि वह काम करने को तैयार हैं। इसके बावजूद उन्हें काम नहीं मिल रहा है।
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लॉकडाउन के दौरान सभी विकास और निर्माण कार्यों को रोक दिया गया था। वहीं, लॉकडाउन की समय सीमा लगातार बढ़ने से लोग अपने घरों को वापस लौटने लगे हैं। लाकडाउन 4.0 में छूट बढ़ी तो रुके कार्यों को गति दी जानी शुरू की गई। बदायूं जनपद के ऑरेंज जोन में शामिल होने से यहां देहात क्षेत्र में रुके पड़े कामों को शुरू करने की अनुमति दी गई। इसके बाद जनपद में काफी संख्या में मनरेगा मजदूरों को काम देने की बात कही गई। विभाग के अनुसार प्रतिदिन 45 हजार से अधिक श्रमिकों को काम दिया जा रहा है। इसमें बाहर से आने वाले लोगों में से सात हजार से अधिक श्रमिकों को काम दिया जा चुका है। हालांकि जमीनी स्तर पर यह विभाग की कोरी आंकड़ेबाजी साबित हो रही है।
सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है कि सभी श्रमिकों को काम दिया जा रहा है जबकि हमारे पास मनरेगा का कार्ड है। इसके बावजूद हमें काम नहीं मिल सका है। -भूपेंद्र सिंह, ग्राम बीधानगला
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एक साल पहले हमें काम दिया गया था। उस समय हमारा कार्ड भी बनाया गया था। पर इन दिनों हमें कोई काम नहीं दिया गया। प्रधान से भी कई बार कह चुके हैं। - पीतांबर, ग्राम बीधानगला
जॉब कार्ड धारकों को लगातार काम दिया जा रहा है। बुधवार को 45 हजार से ज्यादा लोगों को काम दिया गया है। हमारा लक्ष्य एक सप्ताह के अंदर 60 हजार लोगों को रोजगार मुहैया कराने का है। अगर किसी श्रमिक को काम मिलने पर दिक्कत आ रही है तो वह मुझे या ब्लॉक पर संपर्क करें। तुरंत काम दिया जाएगा। - आरएस यादव डीसी, मनरेगा
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