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बीस साल बाद घर लौटा नाथू, बिक चुकी जमीन, मृत मान चुके थे परिजन

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ओरछी (बदायूं)। ग्राम बझेड़ा नूतन के रहने वाले नाथूलाल का दिमागी संतुलन क्या बिगड़ा कि वह अपने परिवार और जमीन से हाथ धो बैठे थे। नाथूलाल करीब बीस साल गांव और परिवार वालों के लिए लापता रहे। तब तक उनकी बहनों ने उन्हें मृत घोषित करा दिया। उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया और उनके हिस्से की जमीन अपने नाम करा ली। बाद में उनकी जमीन बेच दी। अब नाथूलाल अपने गांव लौट आए हैं। अब उनके पास सिर्फ लोगों की हमदर्दी ही बची है।
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करीब 50 वर्षीय नाथूलाल पुत्र सियाराम फैजगंज बेहटा थाना क्षेत्र के ग्राम बझेड़ा नूतन निवासी हैं। नाथूलाल अपने मां-बाप के इकलौते बेटे हैं। उनके दो बहनें हैं, जिनमें हरप्यारी पत्नी मुकेश की शादी बिसौली तहसील कॉलोनी में हुई है, जबकि सोमप्यारी पत्नी कालीचरन की शादी संभल जिले में बहजोई थाना क्षेत्र के ग्राम सीकरी में हुई है। नाथूलाल की शादी नहीं हुई थी। जब नाथूलाल 30 साल के थे। तब वह रेलवे ट्रेनिंग कॉलेज चंदौसी में प्राइवेट नौकरी कर रहे थे। बताते हैं कि वह बचपन से मानसिक मंदित थे। वर्ष 1998 में कार्तिक पूर्णिमा पर अपने गांव के लोगों के साथ राजघाट गंगा स्नान करने गए थे। अपने साथियों से बिछड़कर धोखे में चंदौसी आने वाली ट्रेन की बजाय वह किसी दूसरी ट्रेन में बैठ गए। घूमते फिरते मथुरा के रिफाइनरी इलाके में भैसा गांव में एक डेयरी में काम करने लगे। काफी समय डेयरी पर रहे। वहां से एक ट्रक चालक उन्हें फिरोजाबाद के थाना सिरसागंज के ग्राम नोरमई ले गया, जहां फौजी होटल पर छोड़ दिया। तभी से नाथूलाल फौजी होटल पर काम कर रहे थे। करीब आठ-दस दिन पहले उन्हें तेज बुखार आया। होटल मालिक अवधेश यादव ने उन्हें दवा दिलाई। इलाज हुआ तो चामत्कारिक रूप से उनकी याददाश्त भी लौट आई। उनके बताने पर गांव के कुछ लोग फिरोजाबाद पहुंचे और नाथूलाल को शनिवार देर शाम गांव लेकर लौटे।
इधर, जनवरी 2006 में उनकी बहनों ने फैजगंज थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने को पत्र दिया था। वर्ष 2014 में उन्होंने लेखपाल से मिलकर नाथूराम का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। दोनों बहनों ने नाथूराम की जमीन अपने नाम करा ली। उसके बाद बंटवारा भी कर लिया। सोमप्यारी ने 90 हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से पांच बीघा जमीन बेच दी, जबकि हरप्यारी ने एक लाख 50 हजार रुपये के हिसाब से पांच बीघा जमीन बेची। नाथूलाल के नाम करीब 16 बीघा जमीन थी, जिसमें से दो बीघा चकबंदी आदि में चली गई। अब नाथूलाल के पास सिर्फ चार बीघा जमीन बची है। दोनों बहनों ने नाथूलाल के देखभाल की जिम्मेदारी ली है लेकिन इस समय नाथूलाल अपने चचेरे भाई विजय के घर पर खाना खा रहे हैं।
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रद्द कराएंगे मृत्यु प्रमाण पत्र
-नाथूलाल का मृत्यु प्रमाण पत्र अब परिवार के लोगों के लिए परेशानी की बात बन गया है। उन्होंने इसके लिए मोहल्ले के लोगों से बातचीत की। परिवार के लोग कह रहे हैं कि वह अब नाथूलाल का मृत्यु प्रमाण पत्र रद्द कराएंगे। इसके लिए वह किसी अधिवक्ता से सलाह लेंगे। तभी आगे की प्रक्रिया शुरू कराएंगे।
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