बदायूं। दुष्कर्म और दुष्कर्म के प्रयास के मामलों की अब वैज्ञानिक जांच होगी। इसके लिए जिले में तीन डॉक्टरों को फॉरेंसिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण दिल्ली में दिया जाएगा। दिल्ली के एलएनजेएन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस में एक्सपर्ट वैज्ञानिक तरीकों से दुष्कर्म की जांच का डॉक्टरों को प्रशिक्षण देंगे। कई बार दुष्कर्म के मामले में जांच में वैज्ञानिक तथ्यों के अभाव की वजह से पीड़िता को न्याय में बाधा आती है। कई बार निर्दोषों पर कार्रवाई हो जाया करती है। ऐसे में व्यवस्था सुधार को सरकार ने यह निर्णय लिया है।
जिले में जिला कटरा सदाअतगंज, मूसाझाग थाना और उझानी कोतवाली बलात्कार कांडों को लेकर काफी चर्चित रहे हैं। अब तक दुष्कर्म के मामलों में सामान्य रूप से स्लाइड बनाकर और पीड़िता का प्राइवेट पार्ट चेक कर मेडिकल जांच रिपोर्ट दे दी जाती है। कई बार यह वैज्ञानिक तथ्यों पर खरी नहीं उतरती। दुष्कर्म और दुष्कर्म की कोशिश के झूठे मामले भी काफी तादाद में दर्ज कराए जाते हैं। कई बार निर्दोष फंस जाया करते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर जब वैज्ञानिक तरीके से दुष्कर्म और दुष्कर्म की कोशिश के मामलों में मेडिकोलिगल जांच करेंगे, तो जांच रिपोर्ट में किसी तरह की खामी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी। जांच करने वाले डॉक्टरों को फॉरेंसिक किट भी उपलब्ध कराई जाएगी। दुष्कर्म और दुष्कर्म की कोशिश के मामले में 24 घंटे के भीतर मेडिकोलिगल जांच का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसका फायदा न सिर्फ वास्तविक पीड़िता को मिलेगा बल्कि मामला फर्जी होने पर निर्दोष भी सजा से बच सकेंगे।
प्रत्येक जिले से दिया जाएगा तीन डॉक्टर को प्रशिक्षण
-दुष्कर्म और दुष्कर्म की कोशिश के मामलों में वैज्ञानिक आधार पर फॉरेंसिक जांच के लिए प्रदेश के हर जिले से तीन डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पूरी कवायद केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन चल रही है। बदायूं से भी तीन डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिन डॉक्टरों को प्रशिक्षण लेना है उनके नाम की सूची पहले केंद्रीय गृह और स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाएगी।
-दुष्कर्म और दुष्कर्म की कोशिश के मामलों की जांच में कोई चूक न हो इसके लिए वैज्ञानिक आधार पर इन मामलों में जांच की जाएगी। जिले के तीन डॉक्टरों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन चल रही है।
-डॉ. यशपाल सिंह, सीएमओ