देहात क्षेत्रों से बाजार करने के आने वाले लोगों को जब पेशाब या शौच करने की जरूरत होती है, तो उन्हें इधर उधर ऐसे किसी कोने को देखना पड़ता है, जहां आम लोगों को नजर न पड़े। इनके साथ ही घरों से बाहर निकले शहरियों और दुकानदारों को भी इस मजबूरी से दो चार होना पड़ता है। ऐसे में शहर के तमाम व्यस्ततम इलाकों में पेशाब के लिए जगह न मिलने पर मजबूरी में उन्हें खुद पर नियंत्रण करना पड़ता है। शहर के व्यस्ततम इलाकों में शौचालय या पेशाबघर बनाने के लिए जगह न होने की वजह से पालिका प्रशासन और जिला प्रशासन भी मजबूर थे, लेकिन मोबाइल टॉयलेट की सुविधा से शहरियों को पेशाब और शौच के लिए बाजार में भी सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद जगी थी। पालिका की यह सुविधा पालिका कर्मियों की लापरवाही की वजह से शहरियों और बाजार में आने वाले लोगों को नहीं मिल पा रही है।
नगर पालिका परिषद ने लाखों रुपये खर्च करके करीब एक साल पहले दो मोबाइल टॉयलेट खरीदे थे। ठेकेदार ने उन मोबाइल टॉयलेट को पालिका परिषद को हैंडओवर भी कर दिया था, लेकिन अभी तक वो मोबाइल टॉयलेट पालिका परिषद के वाटर वर्क्स की शोभा बढ़ा रहे हैं। पालिका के लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद शहरियों को मोबाइल टॉयलेट का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं, लंबे समय से खड़े दोनों मोबाइल टॉयलेट दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं। पालिका कर्मियों के मुताबिक मोबाइल टॉयलेट करीब तीन महीने पहले ही रिसीव कराए जा चुके हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि तीन महीने गुजरने के बाद भी पालिका ने दोनों मोबाइल टॉयलेट को शहर में लोगों की सुविधा के लिए क्यों नहीं रखवाया? जब इनका प्रयोग नहीं करना है तो खरीदे क्यों गए?
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शहर में रखने के दो मोबाइल टॉयलेट की खरीद की गई थी, सप्लाई के बाद पाया कि उनमें कुछ कमियां रह गई थीं, जिन्हें दुरुस्त कराने के बाद ही पालिका ने मोबाइल टॉयलेट करीब तीन माह पहले प्राप्त कर लिए हैं। शहर में उनकी सुविधा देने के लिए पालिका बोर्ड की अनुमति की जरूरत है, अनुमति मिलने के बाद मोबाइल टॉयलेट शहर में रखवा दिए जाएंगे।
-ललतेश सक्सेना, ईओ नगर पालिका परिषद