व्यापारी के पुत्र की हत्या के अपहरण का मामला
शहर का तहसील, घंटाघर, गोपीचौक बाजार बंद रहा
गुरुवार को घटना के विरोध में व्यापारी सड़कों पर दिखे। घंटाघर बाजार की अधिकांश दुकानें सुबह से ही नहीं खुली। जो दुकानें खुली थीं उनको भी एक पक्ष के लोगों ने जबरन बंद करा दिया। इससे टकराव की स्थिति बनने लगी। खासतौर पर गोपी चौक इलाके में इस दौरान माहौल बिगड़ते-बिगड़ते बचा। बाद में पुलिस ने उसैदुल के परिवार वालों और व्यापारियों को समझाबुझा कर शांत किया। शाम को बाजार फिर से खुल गए।
कड़ी सुरक्षा में जेल भेजे गए आरोपी
तीनों आरोपियों को बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर आरोपियों को कोतवाली से हटाकर सिविल लाइंस थाने में रखा गया था। यहां भी पुलिस के साथ पीएसी को लगाया गया। बुधवार को पुलिस ने पहले जोएब, फरहान और लब्बू को पहले कड़ी सुरक्षा के बाद मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा। बाद में इनको जेल भेज दिया गया। एसपी सिटी अनिल यादव ने बताया कि तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। घटना का मास्टरमाइंड फरहान है। जिस दुकानदान ने प्री-एक्टीवेट सिम बेची थी, उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है। चौधरी सराय में फिलहलल पुलिस और पीएसी की तैनाती रहेगी।
आशियाने की चाह में फौजी का नाती बना कातिल
पूरी घटना का मास्टर माइंड फरहान है। यह मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के शिमला का रहने वाला है। फरहान के बाबा सेना के अफसर थे। उसके पिता नूर मोहम्मद की मौत हो चुकी है। फरहान का सपना शहर में एक घर बनाने का था। बस इसी सपने को पूरा करने के लिए उसके कदम अपराध की ओर मुड़ गए। शिमला में बर्फबारी की वजह से फरहान हाल में ही अपनी मां के साथ मौसी के घर आया था। घटना के मास्टरमाइंड फरहान का बदायूं अपनी मौसी के घर आना-जाना लगा रहता था। उसकी यहां लब्बू और जोएब से दोस्ती हो गई। फरहान के पिता नूर मोहम्मद का शिमला में क्रेन का कारोबार था। पिता की मौत के बाद कारोबार फरहान संभालने लगा। फरहान का बदायूं में एक घर बनाने का सपना था। यह सपना पूरा करने के लिए ही उसने जोएब और लब्बू के साथ मिलकर जूता व्यापारी खालिद के पुत्र के अपहरण की योजना बनाई। लब्बू और जोएब के भी महंगे शौक थे, तो यह भी उसके साथ शरीक हो गए। पूछताछ में फरहान ने यह सब कबूल किया है। पुलिस के अनुसार फरहान ने उसैदुल का गला घोंटा था। इस दौरान जोएब ने उसैदुल के हाथ पकड़े थे।
उझानी से नहीं शहर से ही खरीदा गया था सिम
जूता व्यापारी खालिद के सात वर्षीय बेटे उसैदुल अली के अपहरण का योजना पांच जनवरी को ही बन गई थी। आरोपी फरहान, लब्बू और जोएब ने मोहल्ले के ही मोबाइल शॉप संचालक शाहरूख से फर्जी आईडी पर प्री-एक्टीवेट सिम खरीदा था। इसी सिम से आरोपियों के बीच आपस में की गई एक कॉल ने पुलिस का रास्ता आसान कर दिया। बुधवार को पुलिस ने सिम बेचने वाले शाहरूख को गिरफ्तार कर लिया है। शहर के मोहल्ला चौधरी सराय निवासी जूता व्यापारी खालिद अली का सात वर्षीय बेटा उसैदुल अली लापता हो गया था। मंगलवार को मोहल्ले के ही फरहान, लब्बू और जोएब की निशानदेही पर पुलिस ने कुरऊ के जंगल के उसैदुल की अधजली लाश बरामद की थी। तीनों ने फिरौती के लिए उसैदुल को अगवा किया था। तीनों ने कई दिन पहले अपहरण की योजना बनाई। पांच जनवरी को उझानी के मोहल्ला बाजार कलां निवासी धर्मेंद्र नाम के युवक की आईडी पर चौधरी सराय के शाहरुख से प्री-एक्टीवेट सिम खरीदी। वारदात वाले दिन ही उसैदुल की हत्या की और रात में साढ़े 10 बजे खालिद को फोन किया। गौर करने वाली बात यह है कि आरोपियों ने जिस मोबाइल में सिम का इस्तेमाल किया उस मोबाइल में उससे पहले कोई सिम नहीं डाला गया था। पहला सिम डाल कर पहली कॉल खालिद को ही की गई। अपराधी कितना शातिर क्यों न हो, वह कहीं ना कहीं चूक कर ही जाता है। यहां भी तीनों से गलती यह हुई कि इस बीच एक कॉल जोएब के फोन पर कर दी गई। यही कॉल पुलिस के लिए क्लू बन गई। इसके बाद राजफाश होते चले गए।
वारदात में इस्तेमाल दोनों बाइक बरामद हुईं
बदायूं। वारदात में एक नहीं दो बाइकों का इस्तेमाल हुआ था। इनमें एक बाइक फरहान की है। दूसरी बाइक मृतक उसैदुल के चचेरे भाई आरिस की थी। लब्बू घटना वाले दिन यह बाइक मांग कर ले गया था। अपनी बाइक पर फरहान ने उसैदुल को बैठाया। दूसरी बाइक पर लब्बू और जोएब थे। आरोपियों की मानें तो तीनों उसैदुल को लेकर छोटी ज्यारत के पीछे से जाने वाली रोड के रास्ते कुरऊ के जंगल में ले गए। वहां उसकी गला दबाकर हत्या कर दी।
चौधरी सराय में दूसरे दिन भी पुलिस का पहरा
चौधरी सराय मोहल्ले में बुधवार को भी तनाव का माहौल रहा। आरोपियों के परिवार वाले अपने घरों में नहीं लौटे हैं। तनाव के मद्देनजर यहां पुलिस और पीएसी की तैनाती रही। मंगलवार को उसैदुल का शव बरामद होने के बाद आरोपियों के घरों में तोडफ़ोड़ और आगजनी की गई थी। बुधवार को भी पत्थर फेंके गए। कहीं कोई अप्रिय वारदात न हो, लिहाजा सुरक्षा बल मुस्तैद रहा।
वीआईपी नंबर की है अपाचे बाइक
बदायूं। उसैदुल के अपहरण में जिस अपाचे बाइक का इस्तेमाल किया गया वह फरहान की है। इस बाइक का नंबर भी वीआईपी 0001 है। सफेद रंग की अपाचे बाइक फरहान ने कुछ महीने पहले ही खरीदी थी।