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उझानी के तालाब में कई कछुए मरे, पानी विषैला हो जाने का शक

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उझानी (बदायूं)। कोतवाली क्षेत्र के गांव बसोमा के तालाब में शुक्रवार सुबह कई मृत कछुओं के नजर आने से सनसनी फैल गई। मौके पर ग्रामीणों का जमघट लग गया। सूचना पर वन विभाग की टीम भी पहुंची और जानकारी जुटाने के लिए ग्रामीणों से बात की। टीम में शामिल वन कर्मियों ने मृत कछुओं की संख्या छह-सात बताई है। वहीं, ग्रामीणों के अनुसार मृत कछुओं की संख्या दर्जन भर से ज्यादा थी।
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तालाब बसोमा गांव से दक्षिणी छोर पर है। सुबह में खेतों की ओर निकले ग्रामीणों की नजर तालाब पर पड़ी तो उन्हें पानी में कई कछुए उतराते दिखाई दिए। सभी कछुए मृत थे। इसकी भनक लगते ही कई और लोग भी मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। डीएफओ ईशा तिवारी ने वन दरोगा अमित सोलंकी की अगुवाई में चार सदस्यीय टीम को मौके पर भेजा। वन कर्मियों ने ग्रामीणों से जानकारी करने के बाद मृत छह कछुओं को बरामद कर लिया। ग्रामीणों की मानें तो तालाब में मृत कछुओं की संख्या दर्जन भर से अधिक रही है जिन्हें तालाब के पास ही गड्डा खोदकर दबा दिया गया। इसके विपरीत मृत छह कछुओं का पोस्टमार्टम कराने के लिए आईवीआरआई भेजा गया है।
पोस्टमार्टम के बाद ही कछुओं की मौत को लेकर हकीकत सामने आएगी लेकिन डीएफओ ने बताया कि गांव की नालियों का पानी इसी तालाब में पहुंचता है। इससे पूरा तालाब विषैला हो गया है। जो कछुए मरे हैं, वह तालाब में जमीन के अंदर रहने वाली प्रजाति के हैं। इसलिए काफी हद तक संभव है कि कछुओं की मौत इसी वजह से हुई हो।
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पिछले साल अब्दुल्लागंज के तालाब में हुई थी सैकड़ों कछुओं की मौत
उझानी। बसोमा के तालाब में जिस तरह से कछुओं की मौत सामने आई है, ठीक ऐसे ही पिछले कोतवाली क्षेत्र के ही गांव अब्दुल्लागंज में सैकड़ों कछुए मृत पाए गए थे। वन विभाग की टीम ने उस समय करीब एक दर्जन मृत कछुओं को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया था कि नालियों के पानी से विषैले हो गए तालाब के पानी के कारण मौत हुई है जबकि पूर्व रवेंद्र सक्सेना समेत कई लोगों ने तालाब में विषाक्त पदार्थ डाल दिए जाने की आशंका जताई थी।
कीटनाशक स्प्रे की मशीन तालाब में धो लेने का शक
उझानी। कछुओं के मौत के मामले में बसोमा निवासी ग्रामीणों को नालियों की वजह से तालाब का पानी विषैला हो जाने की बात गले नहीं उतर रही है। ग्रामीणों की मानें तो ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है। नालियों का पानी तो सालों से तालाब में जा रहा है। अन्य तालाबों में भी यह पानी गिरता है लेकिन कहीं कछुए नहीं मरे। चर्चा ये भी है कि पिछले दिनों एक व्यक्ति ने मक्का की फसल में कीटनाशक का स्प्रे करने के बाद मशीन समेत खाली बाल्टियों को तालाब के पानी से धोया था। ऐसे में इसके चलते भी तालाब का पानी जहरीला होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
बसोमा के तालाब में जो कछुए मरे हैं, उनकी मौत की सही वजह पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगी। प्रारंभिक जांच में पता लगा है कि कछुए 10 से 15 दिन पहले ही मर चुके हैं। मृत कछुए तालाब के पानी पर उतराने लगे, तभी ग्रामीणों को पता लग पाया।
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- ईषा तिवारी, डीएफओ।
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