दिनोंदिन बढ़ती जा रही भक्तों की देवी मां पर श्रद्धा
वक्त के साथ बदल गए मेले में मनोरंजन के साधन
कहावत है कि वक्त हर चीज को बदल देता है। कई मायनों में यह बात एकदम सच साबित होती है, लेकिन क्षेत्र में ऊंचे टीले पर स्थित मंगला माता के मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा अब भी वही है। ऐतिहासिक मंदिर में श्रद्धालु पहले की तरह लोग माता के दर्शन करके मनौतियां मांगते हैं और वे पूरी भी होती हैं। इससे भक्तों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हां, इतना जरूर हुआ कि वक्त के साथ मेले का स्वरूप और परिवेश बदल गया है।
कस्बे से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर आंवला मार्ग पर एक ऊंचे टीले पर स्थित मंगला माता देवी मंदिर पर करीब डेढ़ सौ साल पहले से विशाल मेला लगता चला आ रहा है। पुराने जमाने में यह मेला दरी, कालीन, काठ नखाशा, ढोलक तथा पत्थर की कारीगरी की वस्तुएं बेचने के लिए मशहूर था। पाश्चात्य संस्कृति के साथ पश्चिमी वस्तुओं का क्रेज बढ़ने की वजह से मेले का स्वरूप तथा परिवेश बदल गया है।
मेले में लगने वाली दुकानों का स्वरूप बदलने की वजह से दरी कालीन की जगह फोम के गद्दों एवं चादरों ने ले ली है। लकड़ी का तख्त, मसहरी खरीदने वाले दीवान, बेड खरीदते हैं, बच्चे गुड्डे-गुड़ियों की जगह टैडीवियर का तरजीह दे रहे हैं और चाट पकौड़ी की जगह फास्ट-फूड, आइसक्रीम खाने लगे हैं। फ्रिज और वाटर कूलर की वजह से लोगों ने घड़े खरीदने कम कर दिए हैं।
इसके साथ ही मेले में आने के लिए श्रद्धालुओं द्वारा प्रयोग किए जाने वाले यातायात के साधनों में भी बदलाव आ गया है। लोग बैलगाड़ी, लहड़ू , डनलप, तांगा और साइकिल का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब ट्रैक्टर-ट्रॉली, कार, बस, बाइक से लोग मेले में आते हैं। वक्त की इस भागमभाग में मेले का स्वरूप और लोगों के लिए उपयोगी वस्तुओं की दुकानें भले ही बदल गई हों, लेकिन माता के श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास बढ़ता ही जा रहा है।
युवतियां अच्छे वर के लिए रखतीं स्वास्तिक
वजीरगंज। माता रानी पर लोगों की श्रद्धा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि युवतियां अच्छे वर की कामना करने के लिए स्वास्तिक रखती हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त मां के दरबार में भंडारा कराते हैं। इससे वहां पर तमाम साधुजनों को भंडारा प्राप्त होता है। साथ ही श्रद्धालु अपने बच्चों का मुंडन संस्कार और जात भी करने के लिए आते हैं।
धूप में नंगे पांव करते दर्शन
वजीरगंज। इसे माता कृपा कहें या लोगों की श्रद्धा। इस चिलचिलाती धूप में जहां लोगों को जूते चप्पल पहनकर चलने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं मंगला माता की भक्ति में डूबे श्रद्धालु माता के दर्शन नंगे पांव करते हैं। देवी के भवन में आने के बाद ही भक्त मेला भ्रमण करने के लिए जाते हैं।