बदायूं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार देने के उद्देश्य से संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर सरकार का खासा जोर है। विभाग के अनुसार मनरेगा में महिलाओं की कम से कम 33 प्रतिशत भागीदारी होनी चाहिए, लेकिन जिले में शासन की मंशा सार्थक होती नहीं दिख रही है। हालात ये है कि जिले में महज 19 प्रतिशत महिलाएं ही मनरेगा से काम पा रही हैं।
शासन ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से जोड़ने का निर्देश दिए हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में मनरेगा में महिलाओं की संख्या में अपेक्षित इजाफा नहीं हुआ है। इतना ही नहीं मनरेगा में काम करने वाली महिलाओं की संख्या लगातार गिर रही है। इसको लेकर शासन भी चिंतित है। उन्होंने जिला स्तर पर मनरेगा में महिलाओं की संख्या बढ़ाने पर बल दिया गया है। इसके बाद में भी अधिकारियों ने आधी आबादी को आगे आने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद मेें जिले में कुछ प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी में बढ़ोतरी हुई, लेकिन बाद हल्के-हल्के स्थिति फिर उसी जगह पर आ गई। दरअसल, जिले में दो लाख 22 हजार जॉब कार्ड धारक है। इनमें से एक लाख 50 हजार सक्रिय जॉब कार्ड धारक है। शासन ने विभाग को इस वित्तीय वर्ष में 43 लाख 45 हजार मानव दिवस सृजित किए जाने के निर्देेश दिए हैं। इसके हिसाब से विभाग ने अभी तक 35 लाख 29 हजार मानव दिवस सृजित किए हैं और 80 हजार जॉब कार्ड धारकों को काम दिया जा चुका है। अभी तक 19 प्रतिशत महिलाओं को बमुश्किल रोजगार मिला है, जबकि शासन के निर्देशों के अनुसार 33 प्रतिशत होना चाहिए।
एक तो कम धनराशि, वह भी नहीं मिल पाती समय से
मनरेगा के माध्यम से काम करने वाले श्रमिकों को 182 रुपये प्रतिदिन मजदूरी के रूप में दिया जाता है, जो मौजूदा समय को देखते हुए बेहद कम है। उस पर भी मनरेगा के श्रमिकों को समय से मजदूरी भी नहीं मिल पाती है, जबकि प्राइवेट में काम करने पर श्रमिकों को इससे ज्यादा धनराशि मिलती है, साथ ही नकद रुपये भी मिल जाते है।
महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को काम देना भी एक वजह
ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा के तहत मिट्टी से संबंधित काम कराया जाता है, जो प्रधान व ग्राम सचिव के माध्यम से लोगों को दिया जाता है। इसमें प्रधान श्रमिक के रूप में महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों से काम कराना पसंद करते हैं। उनके पीछे वजह यह है कि मिट्टी उठाने आदि मेहनत के काम में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं कम काम कर पाती है, जिसकी वजह से उन्हें काम भी कम दिया जाता है।
मनरेेगा के तहत देहात क्षेत्र में मिट्टी का काम कराया जा रहा है। शासन ने इसमें महिलाओं की भागेदारी को बढ़ाने पर बल देने के निर्देश दिए हैं। उसी दिशा निर्देशों के क्रम में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
- रामसागर यादव, डीसी उपायुक्त