भाजपा और बसपा के प्रत्याशी चुनाव मैदान से हटे
चार जनवरी को जाएगी निर्वाचन का औपचारिक घोषणा
जिले में जिला पंचायत सदस्य पद की कुल 51 सीटें हैं। अध्यक्ष पद पर निर्वाचन के लिए कम से कम 26 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। सपा की ओर से पहले ही बिसौली विधायक आशुतोष मौर्य की बहन मधु चंद्रा को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था। गुरुवार को नामांकन पत्रों की बिक्री के अंतिम दिन तक सपा की मधु चंद्रा समेत बसपा के पूर्व विधायक योगेंद्र सागर की पत्नी प्रीति सागर और भाजपा की दमयंती वर्मा ने नामांकन पत्र खरीदे थे। इससे लग रहा था कि अध्यक्ष पद पर मुकाबला रोचक होगा, लेकिन शुक्रवार को नामांकन पत्र दाखिल करने भाजपा और बसपा के प्रत्याशी नहीं पहुंचे। सिर्फ मधु चंद्रा ने नामांकन दाखिल किया। अध्यक्ष पद के लिए अब सात जनवरी को मतदान नहीं होगा। चार जनवरी को नामांकन पत्र वापसी के दिन ही मधु चंद्रा के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर दी जाएगी। मधु चंद्रा के अनुमोदक और प्रस्तावकों में अंकुर यादव, महेंद्र सिंह, विनीता देवी, मोहम्मद इरफान और शांति देवी रहे।
कूटनीतिक प्रयास में कामयाब हो गई सपा
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन से पहले माना जा रहा था कि मुकाबला रोचक होगा, लेकिन सपा अपनी कूटनीतिक चाल में कामयाब हो गई। भाजपा और बसपा प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल ही नहीं किए। अगर यह दोनों दल चुनाव मैदान में होते तो सपा के लिए मुश्किल हो सकती थी। राजनीति में दखल रखने वालों की मानें तो अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन के लिए सत्ता पक्ष की ओर से हर हथकंडा अपनाया गया।
कुल 51 सदस्यों वाले जिला पंचायत बोर्ड में अध्यक्ष पद के लिए 26 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि चुनाव में बसपा के 14 और भाजपा के 12 प्रत्याशी सदस्य पद पर निवार्चित हुए थे। ऐसे में विपक्षी सदस्यों की संख्या भी 26 होती है। सपा के बड़े नेता भी इस बारे में जानते थे। अगर अध्यक्ष पद के लिए होने वाले मतदान में भाजपा और बसपा के प्रत्याशी सपा के विरोध में वोट करते तो गणित गड़बड़ा सकता था। बसपा की ओर से पूर्व विधायक योगेंद्र सागर और भाजपा की दमयंती वर्मा ने नामांकन खरीदे थे। ऐसे में सपा ने ऐसी कूटनीति रची कि बसपा और भाजपा के उम्मीदवारों ने नामांकन ही दाखिल नहीं किए। ऐसे में मधु चंद्रा का रास्ता साफ हो गया।
भाजपा, बसपा ने कहा कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया
बदायूं। भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम स्वरूप पाठक की मानें तो अध्यक्ष पद के लिए समीकरण भाजपा के अनुकूल नहीं थे। पार्टी ने किसी को भी प्रत्याशी घोषित नहीं किया। उन्होंने कहा कि दमयंती वर्मा ने नामांकन पत्र खरीदने या खरीदने के बाद उनसे कोई संपर्क नहीं किया। इधर, बसपा जिलाध्यक्ष डॉ. क्रांति कुमार ने भी प्रीति सागर को पार्टी का घोषित प्रत्याशी मानने से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने किसी को भी प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया था। धन और बाहुबल के इस चुनाव में समीकरण उनके पक्ष में नहीं थे। बसपा विपक्षी में बैठेगी।