जिले में तेज गर्म हवा के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है। बहुत जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। खेतों में जिनकी गेहूं की फसल उठ गई है, वे किसान खेतों का रुख नहीं कर रहे हैं। जिनकी फसले हैं वे भी केवल सुबह शाम ही खेतों पर जाते हैं। भीषण गर्मी के कारण शहरों के बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
यहां बता दें कि लगातार बढ़ रहे गर्मी के प्रकोप से लोग परेशान हैं। बृहस्पतिवार को भी एक डिग्री बढ़कर तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पर रुका। चढ़ता तापमान और ऊपर से तेज हवाओं ने लोगों ने बाहर निकलना मुश्किल कर दिया। बाजारों में सन्नाटा छाया रहा। बस अड्डा और रेलवे स्टेशन आदि भीड़भाड़ वाली जगहों पर भी कम लोग ही दिखे। जिन्हें किसी काम को अधिक जरूरी था, वे ही लोग बाहर निकले अन्यथा लोग घरों में ही कैद रहे। जो लोग बाहर निकले वे गमछे लपेटकर या छाता लेकर ही निकल सके। गर्म हवाओं ने लोगों को बहुत परेशान किया। प्यास मिटाने को लोग नलों पर भीड़ लगाए रहे, वहीं पेय पदार्थों की जमकर बिक्री हुई।
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पिछले एक सप्ताह का तापमान डिग्री सेल्सियस में
15 अप्रैल- 39
16 अप्रैल- 40
17 अप्रैल- 41
18 अप्रैल- 40
19 अप्रैल- 40
20 अप्रैल- 39
21 अप्रैल- 41
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हिरनों के प्यासे झुंड देखे तो तालाब भरवाए
दातागंज/बदायूं। कड़ाके की धूप और गर्म हवा से जहां आम आदमी परेशान है, वहीं जंगली जानवरों का हाल बेहाल है। पिछले दिनों सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया दातागंज क्षेत्र के गांव सैंजनी के दौरे पर थे, तो उन्होंने काले हिरणों को झुंड देखा जो प्यास से व्याकुल होकर गांव के समीप आ गया था। सीडीओ ने गांव वालों से जानकारी हासिल की और ग्राम प्रधान को आदेश कर तुरंत सूखे पड़े तालाब भरवाए।
दरअसल, तेज गर्मी के कारण वन क्षेत्रों से निकलकर जीव-जंतु भी पानी को व्याकुल हैं। खुद सीडीओ ने हिरनों की व्याकुलता देखी तो वह भावुक हो उठे। बताया जाता है कि उन्होंने गांव के समीप हांफते हुए हिरनों के झुंड को देखा तो ग्रामीणों से इनके संबंध में बात की। ग्रामीणों ने बताया गर्मी के दिनों में वन क्षेत्रों में पानी का संकट बना हुआ है। प्यासे हिरन अक्सर गांवों के पास आ जाते हैं। यहां नाले-नालियों में भरे पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं।
सीडीओ ने ग्रामीणों से जानकारी होने पर तत्काल ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव को बुलवाया और तत्काल गांव के सूखे पड़े तालाब का भरवाने का निर्देश दिया। उन्होंने बाकी ग्राम पंचायतों को भी दिशा निर्देश दिए हैं कि सूखे पड़े तालाबों को पानी से भरवाया जाए ताकि जानवरों को प्यास से व्याकुल न होना पड़े।