गैंगरेप के आरोपी दोनों बर्खास्त सिपाहियों वीरपाल और अवनीश की गिरफ्तारी से पीड़ित परिवार खुश है। पीड़ित परिवार को अब न्याय का इंतजार है। पीड़ित परिवार का कहना है कि दोनों आरोपियों को सख्त सजा मिले, तभी उनके दिल को तसल्ली मिलेगी।
वीरपाल की गिरफ्तारी के बाद पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि मिलीभगत के कारण पुलिस ने वीरपाल को गिरफ्तार करने में जान-बूझकर लापरवाही बरती। पीड़ित किशोरी के पिता बीमार हैं। जिस दिन घटना हुई थी, वह बरेली में अपनी आंखों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा रहे थे। परिवार वालों ने उनको घटना के बारे में नहीं बताया था। तीन दिन बाद लौटने पर उन्हें घटना के बारे में पता लगा।
परिवार हिरासत में होने से टूट गया वीरपाल
बदायूं। एक सप्ताह तक एसटीएफ, ब्राइम ब्रांच, स्वाट और पुलिस की पांच टीमों को चकमा देने वाला वीरपाल आठ जनवरी को शाहजहांपुर के थाना निगोही के गांव शहजादपुर से अपनी पत्नी सुषमा, पुत्र और साढू शीशपाल यादव को हिरासत में लिए जाने के बाद टूट गया था। यही वजह रही कि नौ जनवरी को यह बदायूं पहुंचा। शहर में चार घंटे रहा। इस दौरान उसने स्पेशल जज (पाक्सो एक्ट) की अदालत में सरेंडर करने के लिए अर्जी दाखिल कर दी। सरेंडर अर्जी पर कोर्ट के 12 जनवरी की तारीख लगाने के बाद वह यहां से चला गया।
इसके बाद से वह कोशिश में था कि उसकी गिरफ्तारी का कोई रास्ता निकल आए। इसके चलते शनिवार से उसकी लोकेशन बरेली में मिल रही थी। नई लोकेशन ट्रेस होने के बाद एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और स्वाट ने बरेली में इसकी घेराबंदी कर ली और रविवार को गिरफ्तार कर लिया। इसे सोमवार को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया जाएगा। सरेंडर की अर्जी की सुनवाई से एक दिन पहले पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अपनी किरकिरी बचा ली है।
सीओ समेत छह पर हो चुकी है कार्रवाई
बदायूं। मामले में जहां आरोपी सिपाही वीरपाल यादव और अवनीश यादव को बर्खास्त कर दिया गया था वहीं बाद में भी कार्रवाई का सिलसिला चलता रहा। मामले में सीओ उझानी एनपी सिंह पर भी गाज गिरी। उनका तबादला पीएसी में मिर्जापुर कर दिया गया।
घटना की रिपोर्ट दर्ज करने वाले मुंशी उदयवीर और उस रात ड्यूटी अफसर एसआई हिमांशु शुक्ला भी सस्पेंड किए जा चुके हैं। मूसाझाग थाने में तैनात आरोपी सिपाही अवनीश के रिश्ते में चाचा लगने वाले एसआई सोबरन सिंह लाइन हाजिर हो चुके हैं। इसके अलावा अवनीश के दो बहनाई अरुण यादव और सुनील यादव को भी सस्पेंड किया जा चुका है। माना जा रहा है कि अब वीरपाल की गिरफ्तारी के बाद कुछ और अधिकारियों-पुलिसकर्मियों पर गाज गिर सकती है।
अब तक का घटनाक्रम एक नजर में
31 दिसंबर, 14: मूसाझाग थाने के सिपाही वीरपाल यादव और अवनीश यादव ने रात आठ बजे किशोरी को उसके गांव से अगवा किया और थाने लाकर वहां के सरकारी आवास में गैंगरेप किया। आधी रात के बाद किशोरी को गांव के बाहर छोड़ा।
1 जनवरी, 15: पीड़िता परिवार के साथ जिला मुख्यालय पहुंची। एसएसपी के आदेश पर रात साढ़े आठ बजे दोनों आरोपी सिपाहियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज। इससे पहले ही दोनों आरोपी सिपाही फरार हो गए।
2 जनवरी: एडीजी क्राइम एचसी अवस्थी, आईजी जोन विजय सिंह मीना, डीआईजी आरकेएस राठौर मूसाझाग थाने पहुंचे। फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने घटनास्थल खंगाला। देर रात दोनों आरोपी सिपाही बर्खास्त कर दिए गए। आंवला के भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने पीड़िता का हाल जाना।
3 जनवरी: पीड़िता की मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि। शाम को कलक्ट्रेट स्थित सभाकक्ष में पीड़िता के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच लाख रुपये की राहत राशि का चेक दिया गया। आरोपियों की गिरफ्तारी को एसटीएफ, क्राइम ब्रांच समेत पुलिस की पांच टीमें लगाई गईं।
4 जनवरी: बर्खास्त सिपाही वीरपाल यादव का बहनोई अरुण यादव और सुनील यादव भी सस्पेंड । वीरपाल का चाचा दरोगा सोबरन सिंह लाइन हाजिर। रिपोर्ट दर्ज करने वाला मुंशी और ड्यूटी अफसर दरोगा हिमांशु शुक्ला सस्पेंड।
5 जनवरी: बदायूं-बरेली की पुलिस टीमों ने नाटकीय ढंग से अवनीश यादव को बरेली जंक्शन से गिरफ्तार किया। बार्डर स्कीम के तहत अंडर ट्रांसफर पुलिसकर्मियों की सूची बनाने का काम शुरू।
6 जनवरी: गैंगरेप का आरोपी बर्खास्त सिपाही अवनीश यादव मेडिकल जांच के बाद जेल भेजा गया।
7 जनवरी: गिरफ्तार आरोपी बर्खास्त सिपाही और पीड़िता के नमूने जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजे गए।
8 जनवरी: पुलिस ने वीरपाल यादव की पत्नी, बच्चे और साढू को शाहजहांपुर के निगोही थाना क्षेत्र के गांव शहजादपुर से पूछताछ के लिए उठाया।
9 जनवरी: वीरपाल यादव चार घंटे शहर में रहा। उसने वकील के जरिए स्पेशल जज पाक्सो एक्ट की कोर्ट में सरेंडर अर्जी भी दी। सरेंडर अर्जी पर 12 जनवरी को सुनवाई तय हुई।
10 जनवरी: वीरपाल यादव की नई लोकेशन बरेली में मिली। शनिवार को पुलिस की गई टीमें इसकी घेराबंदी में जुट गईं।