धर्म के आधार पर हुई जनगणना के आंकड़े बदायूं की राजनीति को भी प्रभावित करेंगे। यह आंकड़े सामने आने के बाद राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा। कांग्रेस, सपा का ज्यादा जोर मुस्लिम वोट बैंक पर होता है। वहीं भाजपा हिंदू वोट बैंक पर अधिकार मानती है। बसपा ऐसी पार्टी है जो चुनाव में हिंदुओं में दलितों के साथ मुसलमानों को जोड़कर चलती है। 2017 के लोकसभा चुनाव में 2011 के धर्म आधारित जानगणना का असर साफ देखने को मिलेगा। यह पहला मौका है जब जिले में हिंदू और मुसलमानों की संख्या साफ हो गई है।
जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक जिले की कुल जनसंख्या 36,81,896 हो गई है। इसमें हिंदुओं की संख्या 28,67,707 और मुसलमानों की 7,90,515 है। आंकड़ों के लिहाज से हिंदु बहुसंख्यक हैं। गौर करने वाली बात यह है कि शहर के मुकाबले गांवों में मुसलमानों की संख्या ज्यादा है। जिले के गांवों में कुल 30,37,301 लोग गांवों में बसते हैं। गांवों में हिंदुओं की जनसंख्या 25,31,627 है। शहरी इलाकों में 3,36,080 हिंदू रहते हैं। जनगणना से पहली बार पता लगा है कि शहरी इलाकों के मुकाबले गांवों में मुसलमान ज्यादा हैं। जिले में कुल 7,90,515 मुसलमानों में से 3,03,963 मुसलमान शहर में बसते हैं। जबकि जिले के गांवों में मुसलमानों की जनसंख्या 4,86,552 है।
धर्म के आधार पर जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक दलों ने इस पर अभी से माथापच्ची शुरू कर दी है। जानकारों की मानें तो हिंदू-मुसलमान की स्थिति साफ होने के बाद चुनाव में कांग्रेस और सपा को ज्यादा मेहनत करनी होगी। बसपा को भी नए सिरे से गोटियां फिट करनी होंगी। हालांकि हिंदूवाद पर चुनाव लडने वाली भाजपा को यह आंकड़े अच्छे संकेत माने जा रहे हैं।