बदायूं। कोरोना वायरस से जंग को लागू लॉकडाउन को 10 दिन बीत चुके हैं। अधिकांश लोग ऐसे हैं जो लॉकडाउन और संक्रमण के खतरे को लेकर सामाजिक दूरी का ख्याल नहीं रख रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में राशन वितरण के दौरान सामाजिक दूरी के नियम का उल्लंघन सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। वहीं, सीमाएं सील होने के बाद भी दूसरे राज्यों से पैदल चलकर मजदूरों के लौटने का सिलसिला अब भी जारी है। कुछ स्थानों पर आस्था भी लॉकडाउन पर भारी पड़ रही है। जिले के अलग-अलग इलाकों से आईं यह तस्वीरें लॉकडाउन की हकीकत को बयां कर रही हैं।
राशन की दुकानों पर नजर नहीं आ रही सामाजिक दूरी
मूसाझाग। गांव मचलई में शुक्रवार को राशन वितरण के दौरान जिस तरह के हालात नजर आए वह कोरोना से जंग में बाधा का संकेत देते हैं। राशन की दुकान पर कार्डधारकों ने सामाजिक दूरी को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया। ग्रामीण मास्क का इस्तेमाल करते भी नजर नहीं आए। कोटेदार ने भी राशन वितरण के दौरान जरूरी नहीं समझा कि वह राशन वितरण के दौरान ऐसी व्यवस्था करे कि ग्रामीण आपस में उचित दूरी बनाए रखें।
दूसरे राज्यों से अब भी पैदल लौट रहे मजदूर
दबतोरी। दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले लोगों के लिए भले ही जगह-जगह शेल्टर होम की व्यवस्था की गई है। सीमाओं को सील कर दिया गया है। इसके बाद भी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में काम करने वाले मजदूरों, फैक्ट्री श्रमिकों का अपने घरों को लौटने का सिलसिला जारी है। इनको शेल्टर होम में रोकने की व्यवस्था नहीं हो पा रही। दबतोरी क्षेत्र में शुक्रवार को दूसरे राज्यों से पैदल चलकर काफी संख्या में मजदूर पहुंचे।
जोरी नगला में लॉकडाउन पर आस्था पड़ी भारी
कादरचौक। गांवों में लोग लॉकडाउन को लेकर ज्यादा संजीदा नहीं दिख रहे हैं। दरअसल, गांवों में बार-बार पुलिस भी नहीं पहुंच पाती। ऐसे में लोग भी भीड़ लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। शुक्रवार को कादरचौक के गांव जोरी नगला में लॉकडाउन पर आस्था भारी पड़ गई। पुलिस की अनदेखी के चलते खजुरिया देव स्थान पर पूजा-अर्चना करने के लिए दर्जनों महिलाएं पहुंच गईं। इनको किसी ने नहीं रोका।
सीमाएं सील फिर भी एक जिले से दूसरे जिले में पहुंच रहे लोग
इस्लामनगर। लॉकडाउन को प्रभावी बनाने के लिए जिले की सभी सीमाओं को सील कर दिया गया है। पैदल चलकर दूसरे राज्यों या जिलों से आने वाले मजदूरों को रोकने के लिए शेल्टर होम बनाए गए हैं। जहां रहने के साथ खाने-पीने की भी व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद लोग एक जिले से दूसरे जिले में पहुंच रहे हैं। अब भी दूसरे राज्यों से मजदूरों के पैदल ही अपने घरों को लौटने का सिलसिला जारी है। ऐसे में सीमाओं को सील करने के पुलिस-प्रशासन के दावों की हकीकत को समझा जा सकता है।