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Budaun News: देर से आए फैसले से सीमित किसानों को मिलेगा लाभ

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बदायूं। केंद्र सरकार ने आलू की गिरती कीमतों को संभालने के लिए प्रदेश में 20 लाख टन आलू खरीदने का फैसला लिया है। इसके तहत 6500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की जाएगी। हालांकि यह निर्णय किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, लेकिन जिले के अधिकांश किसानों को इसका सीधा लाभ नहीं मिल पाएगा, क्योंकि वे पहले ही कम कीमतों पर अपनी उपज बेच चुके हैं।
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जिले में आलू का रकबा पिछले साल की तुलना में अधिक रहा। हालांकि पछेती झुलसा रोग के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, फिर भी गुणवत्ता बेहतर रही। सीजन की शुरुआत में आलू का भाव काफी गिरा हुआ था। हाईब्रिड आलू करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल बिका, जबकि चिप्सोना और 1048 प्रजाति के दाम इससे 150-200 रुपये अधिक रहे। वर्तमान में चिप्सोना का भाव लगभग 700 रुपये और 1048 का भाव इससे थोड़ा अधिक है।
किसानों का कहना है कि अधिकतर ने मार्च या अप्रैल की शुरुआत तक अपनी फसल बेच दी थी। इससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं जिन किसानों ने निजी कोल्ड स्टोरेज में आलू सुरक्षित रखा, अब उन्हें सरकारी खरीद से लाभ मिलने की उम्मीद है। थोक व्यापारी अमर सिंह के अनुसार मंडी में इस समय आलू की आवक कम है। यदि सरकार पहले ही खरीद शुरू कर देती तो किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती थी। संवाद
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किसानों की बात

इस बार आलू का भाव लागत के मुकाबले बेहद कम रहा। बीज, खाद और सिंचाई पर काफी खर्च आया लेकिन बाजार में उचित दाम नहीं मिला। मजबूरी में उन्हें अपनी उपज सस्ते में बेचनी पड़ी। अब सरकार ने खरीद का फैसला लिया है, लेकिन इससे उन्हें कोई फायदा नहीं होगा। उनका मानना है कि अगर यह निर्णय पहले लिया जाता, तो किसानों की स्थिति बेहतर होती।-रोहित, कादरचौक

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-ज्यादातर आलू मार्च में ही बेच दिया था। उस समय बाजार में भाव बहुत नीचे था, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो गया। कुछ किसानों ने भंडारण किया, वे अब लाभ में रहेंगे। सरकार की मंशा अच्छी है, लेकिन समय पर निर्णय न होने से अधिकांश किसान इससे वंचित रह गए। -नन्हे, गंज

जोखिम उठाते हुए कुछ किसानों ने आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा था। अब सरकार की ओर से घोषित खरीद दर से उन्हें अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद है। भंडारण का खर्च भी कम नहीं होता लेकिन इस बार निर्णय उनके पक्ष में गया है। उन्होंने कहा कि यदि कीमत स्थिर रहती है तो किसानों को राहत मिलेगी। -सुबोध शंखधार, कुंवरगांव
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इस बार मौसम और बीमारी दोनों ने फसल को प्रभावित किया। उत्पादन कम हुआ और बाजार में भाव भी गिरा रहा। अधिकतर छोटे किसान भंडारण का खर्च नहीं उठा पाते, इसलिए उन्हें तुरंत फसल बेचनी पड़ती है। ऐसे में सरकारी खरीद का लाभ बड़े या सक्षम किसानों को ही ज्यादा मिलता है। समय पर नीति लागू हो तो बेहतर रहेगा। -पप्पू, कादरचौक

-अभी इस संबंध में कोई आदेश नहीं मिला है। जो भी आदेश मिलेगा उसके अनुरूप खरीद का काम शुरू कराया जाएगा। -अतुल वशिष्ठ, डिप्टी आरएमओ

जिले में अधिकांश आलू कोल्ड स्टोरेज में किसान भंडारण कर चुके हैं, अभी नाममात्र का आलू किसानों के पास बचा है। आलू खरीद को लेकर कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है, आदेश आने पर उसके हिसाब से काम किया जाएगा।- श्याम कुमार गुप्ता, जिला उद्यान अधिकारी
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