बदायूं। नौ साल पहले बिनावर थाना क्षेत्र में प्रधानी का चुनाव हारे प्रत्याशी ने अपने साथियों के साथ मिलकर प्रधान की हत्या करने के मामले में चार दोषियों को जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने मुजरिम करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर 1.05 लाख रुपये का जुर्माना भी डाला है।
हत्या की यह वारदात थाना बिनावर के गांव मई रजऊ में 18 मई 2011 को घटी थी। गांव निवासी गंगादयाल पुत्र रघुवीर ने रिपोर्ट लिखाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक गंगादयाल के पिता रघुवीर गांव के प्रधान थे, जबकि गांव का रामनिवास पुत्र नन्हेलाल प्रधानी का चुनाव हार गया था। इसी कारण वह प्रधान और उनके परिवार वालों से रंजिश मानता था। 18 मई को सुबह सवा नौ बजे गंगादयाल अपने पिता रघुवीर के साथ बाइक पर बदायूं जा रहे थे। वे लोग उसैता गांव के निकट रेलवे फाटक के पास पहुंचे होंगे। तभी उन्हें विरोधी पक्ष के रामनिवास का साथी भगवानदास पुत्र शिवदयाल निवासी ग्राम मटकी थाना भमोरा बरेली, थाना बिनावर निवासी मुस्लिम पुत्र वसीउद्दीन और बरेली के थाना फतेहगंज के गांव घेर पनवड़िया निवासी पप्पू पुत्र हरि सिंह ने घेर लिया और गंगादयाल के पिता रघुवीर की गोली मारकर हत्या कर दी। गंगा दयाल किसी तरह जान बचाकर मौके से भाग गए।
गंगादयाल ने हत्यारोपी रामनिवास, भगवानदास, मुस्लिम और पप्पू के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। जिला सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी अनिल सिंह राठौड़ और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद रामनिवास, भगवानदास, मुस्लिम और पप्पू को मुजरिम करार देते हुये आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर 1.05 लाख रुपये का अर्थदंड भी डाला है।
चुनाव हारने के बाद कर दिया था प्रधान को जान से मारने का एलान
बदायूं। प्रधानी के चुनाव की रंजिश इस कदर बढ़ गई थी कि चुनाव हारने वाले रामनिवास पुत्र नन्हेंलाल ने गांव में एलान कर दिया था कि वह रघुवीर को प्रधान नहीं रहने देगा।
गांव रजऊ निवासी रघुवीर गांव के प्रधान थे। बताया जाता है कि उनकी गांव में अच्छी प्रतिष्ठा थी। रामनिवास चूंकि यह चुनाव हार गया था। इससे वह रघुवीर के प्रति रंजिश मान बैठा। बताते हैं कि चुनाव हारने के बाद उसने गांव में सार्वजनिक रूप से ऐलान कर दिया था कि वह ज्यादा दिनों तक रघुवीर को प्रधान नहीं रहने देगा। उसने ऐसा कर भी दिखाया। भगवानदास इसी साजिश के तहत रामनिवास के साथ अक्सर रहता था। उसका आपराधिक इतिहास बताया जाता है। 18 मई को जब रघुवीर अपने बेटे गंगादयाल के साथ बाइक से शहर की तरफ जा रहे थे। तभी जूनियर हाईस्कूल उसैता के सामने आरोपियों ने उन्हें घेरकर हमला कर दिया था। गंगादयाल के अनुसार भगवानदास के हाथ में उस समय लाठी थी, जिसे मारकर उसने मोटरसाइकिल को गिरा दिया था। इसके बाद मुस्लिम व पप्पू ने उसके पिता को गोली मार दी। उस समय गांव के लोगों से भरा एक ट्रैक्टर ट्राली भी जा रहा था, लेकिन वारदात से डरकर उसका चालक ट्रैक्टर भगा ले गया। इसके बाद आरोपी तमंचा लहराते हुए भाग गए। उसने भी भागकर जैसे तैसे जान बचाई थी। गंगादयाल ने आरोप लगाया था कि उसके पिता की हत्या रामनिवास ने कराई थी। इसके बाद उसने चारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।