बदायूं। नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए जिला अस्पताल का ओएसटी (ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी) सेंटर नई उम्मीद बनकर उभरा है। यहां उपचार और काउंसलिंग के जरिये लोग नशे की गिरफ्त से बाहर निकलकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। वे अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं। वर्ष 2024 से संचालित इस केंद्र में अब तक 305 लोगों का पंजीकरण हो चुका है, जबकि वर्तमान में 212 मरीज नियमित उपचार ले रहे हैं। इनमें से 28 मरीज पूरी तरह नशे से मुक्त होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।
जिले में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। खासकर युवा वर्ग तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल स्थित ओएसटी सेंटर पर मरीजों को नियंत्रित दवाएं, मनोवैज्ञानिक परामर्श और नियमित निगरानी उपलब्ध कराई जा रही है। उपचार के दौरान मरीजों की नशे पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जाती है, जिससे वे समाज और परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सके।
सेंटर पर आने वाले अधिकांश मरीज 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के हैं। चिकित्सकों का कहना है कि नशे की वजह से कई लोग सामाजिक और पारिवारिक जीवन से कट जाते हैं। ऐसे मरीजों को दवाओं के साथ मानसिक सहयोग भी दिया जाता है, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़े और वे दोबारा नशे की ओर न लौटे। संवाद
प्रतिदिन 100 से 120 लोग पहुंच रहे यहां
ओएसटी सेंटर पर केवल गंभीर नशे के आदी ही नहीं, बल्कि बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू का सेवन करने वाले लोग भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन लगभग 100 से 120 लोग नशा छोड़ने की सलाह और उपचार के लिए केंद्र पर आते हैं। चिकित्सक उनकी काउंसलिंग कर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराते हैं। नियमित उपचार लेने वाले मरीजों में सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।
नशे की लत एक बीमारी है, जिसका उपचार संभव है। समय पर इलाज, परिवार का सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति से कोई भी व्यक्ति नशे से बाहर निकल सकता है। उन्होंने लोगों से तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की अपील की। अब तक 28 मरीजों को नशा छुड़वाया गया है।
-डॉ. शिव मोहन कमल, वरिष्ठ फिजिशियन, नशा मुक्ति उपचार केंद्र