बदायूं। जोगीपुरा के गुरुद्वारा हाल में आयोजित सत्संग में आध्यात्मिक संत बाबा फुलसंदे महाराज ने कहा कि ईश्वर का स्मरण करते रहना ही मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। शेष सब कुछ व्यर्थ है। इसलिए इधर-उधर की बातें छोड़कर एक मात्र प्रभु का ही स्मरण करना चाहिए।
बाबा फुलसंदे वाले महाराज ने असुरों के गुरु शुक्राचार्य के बारे में विस्तार बताया। कहा कि जिले की सीमा पर वर्तमान कस्बा उसावां के निकट पटना देवकली में गुरु शुक्राचार्य ने शिव के मंदिर की स्थापना की थी, जो आज भी पटना देवकली मंदिर के नाम से विख्यात है।
बताया कि गुरु शुक्राचार्य ने पटना देवकली को अपनी तपोस्थली बनाया। देवताओं ने यहां अष्टमुखी शिवलिंग की स्थापना की। बोले, ईश्वर की भाषा मौन है। परमात्मा बिना कुछ बोले, बिना कुछ कहे सबको पहचान लेता है, हर किसी की इच्छा को जान लेता है। परमात्मा की शरण में जाने के लिए संतों की कृपा जरूरी होती है।
उन्होंने एक प्रसंग के माध्यम से स्पष्ट करते हुए कहा कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। जमीन, सूरज, चंद्रमा किसी का नाम, किसी की जाति, किसी का देश, धर्म या ग्राम पूछकर सेवा नहीं करते, ये तो निस्वार्थ भाव से सबकी सेवा में लगे रहते हैं। मनुष्य को जीवन में मानवता के गीत गाकर सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए और भगवान का स्मरण करना चाहिए।
उन्होंने कहा, परमात्मा आत्मा के रिश्ते को अच्छी तरह जानता है। प्रत्येक मानव की प्रेम भावना और सेवा समर्पण को पहचानता है। ऐसा कुछ भी नहीं है जो परमात्मा से छिपा हो। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार अशोक खुराना, सुशील धींगड़ा, विवेक खुराना, अशोक कुमार, अरविंद गुप्ता, गौरव धींगड़ा, विष्णु देव चाणक्य आदि मौजूद रहे।