म्याऊं (बदायूं)। म्याऊं के सत्यदेव विद्यापीठ जवाहर नगला इंटर कॉलेज में क्वारंटीन 72 मजदूरों को रविवार शाम उनके घर भेज दिया गया। ये सभी मजदूर मध्य प्रदेश के छिंदबाड़ा जिले से लौटे थे। क्वारंटीन सेंटर रवाना करते समय उन्हें राशन के पैकेट दिए दिए गए। उन सभी से 14 दिन तक अपने घर में क्वारंटीन रहने को कहा गया है।
लॉकडाउन में फंसे मध्य प्रदेश के छिंदबाड़ा जिले से 80 मजदूरों को रोडवेज में 29 अप्रैल को बदायूं लाया गया था। इनमें आठ मजदूर शाहजहांपुर के रहने वाले थे। जबकि 72 मजदूर म्याऊं और उसके आसपास इलाके के रहने वाले हैं। इन सभी को म्याऊं स्थित सत्यदेव विद्यापीठ जवाहर नगला इंटर कॉलेज में बने क्वारंटीन सेंटर में रखा गया था। वहां रहने के दौरान सभी मजदूरों का मेडिकल चेकअप कराए गया। हालांकि कोई मजदूर कोरोना संक्रमित नहीं निकला। शाहजहांपुर के आठ मजदूरों को दो दिन पहले ही उनके घर भेज दिया गया।
रविवार शाम इन मजदूरों को अलग-अलग वाहन में उनके घर भेज दिया गया। जिला प्रशासन की ओर से सभी मजदूरों को राशन राशन के पैकेट दिए गए। वहां मौजूद एसडीएम दातागंज कुंवर बहादुर सिंह और सीओ दातागंज एसके सिंह ने निर्देश दिया कि घर जाकर कोई बाहर न निकले। सभी लोग 14 दिन तक होम क्वारंटीन रहें। इससे मजदूर और उनके परिवार वाले सुरक्षित रहें। घर जाते समय सभी मजदूरों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। इस दौरान बीडीओ वीपी सिंह भी मौजूद रहे। घर जाने वाले मजदूरों में 19 ककराला, दो सूरजपुर, एक मिढई नगला, 18 ग्राम कोड़ा जयकरन, एक बिहारीपुर, 10, उतरना गांव, चार सेवानगला, तीन बसई, एक उदयपुर और दो मजदूर लखीमपुर खीरी के बहादुर नगर के रहने वाले हैं।
परिवार से मिलने को भागा था क्वारंटीन युवक
बदायूं। क्वारटीन सेंटर जवाहर नगला इंटर कॉलेज से भागे युवक का गांव मात्र एक किलो मीटर दूर है। वह मध्य प्रदेश के छिंदबाड़ा से लौटा था। घर के नजदीक पहुंचने के बावजूद परिजन से न मिल पाने की वतह से वह चिड़चिड़ा हो गया था। परिजन से मिलने की वजह से ही वह क्वारंटीन सेंटर से भागा था। इसी वजह से उसने एडीओ के हाथ में काटा था। रविवार शाम अन्य मजदूरों के साथ उसे भी घर भेज दिया गया था। संवाद