कादरचौक। मुंबई से डीसीएम में भरकर मजदूरों को अवैध रूप से लाने का सिलसिला थम नहीं रहा। बुधवार को डीसीएम में भरकर मुंबई से 60 मजदूर कादरचौक पहुंचे थे। बुधवार को भी दो डीसीएम में भरकर 100 मजदूर यहां पहुंचे। बार्डर पर पुलिस ने इनके नाम-पता नोट कर रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम थर्मल स्क्रीनिंग करने के बाद इन मजदूरों को घरों में क्वारंटीन रहने की हिदायत देकर जाने दी रही है। इसकी वजह से गांवों में भी कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि थर्मल स्क्रीनिंग में सभी सामान्य मिले हैं।
कादरचौक ब्लॉक में प्रशासन की ओर से चौड़रा, नूरपुर और असरासी में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। यह क्वारंटीन सेंटर खाली पड़े हैं। प्रशासन इन्हें सेंटर में न रखकर घरों में क्वारंटीन कर रहे हैं। इससे गांवों में संक्रमण फैलने का मंडराने लगा है। इस संबंध में बीडीओ गोपाल प्रसाद कुशवाह से बात करने की कोशिश की गई। उनका मोबाइल कवरेज एरिया से बाहर बोलता रहा। सीएचसी प्रभारी डॉ. अवधेश राठौर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से असरासी में आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है। कोरोना संदिग्धों को यहां रखा जाता है। क्वावारंटीन सेंटर की व्यवस्था प्रशासन की है। इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। एसओ इंद्रेश कुमार का कहना है कि आने वाले मजदूरों के नाम-पते नोट किए जा रहे हैं। हालांकि, गांवों में कोरोना के खतरे को लेकर यह लोग कोई जवाब नहीं दे रहे।
गांवों में कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर गंभीरता नहीं
कोराना संक्रमण को लेकर मुंबई के हालात बेहद खराब हैं। इसके बावजूद जिस तरह से अवैध रूप से डीसीएम में भरकर मुंबई से मजदूरों को लाया जा रहा है वह खतरनाक है। इससे भी ज्यादा खतरा गांवों में कोरोना संक्रमण फैलने को लेकर है। गौर करने वाली बात यह है कि कार्रवाई के नाम पर प्राथमिक जांच कर इन मजदूरों को होम क्वारंटीन किया जा रहा है। मंगल और बुधवार को तीन डीसीएम से करीब 160 मजदूर कादरचौक पहुंच चुके हैं। इनमें ज्यादातर मजदूर ककराला, असरासी, बेहटा डंबरनगर, गौरामई, जगत, सखानू ,अलापुर के हैं। कार्रवाई के नाम पर पुलिस बार्डर पर सिर्फ मजदूरों के नाम पते नोट कर रही है। पुलिस प्रशासन गांवों में कोरोना फैलने को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा।
मुंबई-कादरचौक के बीच दौड़ रहीं चार डीसीएम
नाम न छापने की शर्त पर कुछ मजदूरों ने बताया कि ककराला की चार डीसीएम हैं। यह मुंबई से बदायूं के मजदूरों को लाने का काम कर रही हैं। डीसीएम के पास फल, सब्जी आदि की सप्लाई का परमिट है। मुंबई से घरों को लौटने वाले मजदूरों को डीसीएम में बैठाने के बाद डीसीएम को त्रिपाल से पैक कर दिया जाता है। कहीं कोई जांच नहीं होती। किराया जरूर ज्यादा खर्च होता है। परेशान मजदूर आसानी से घरों को पहुंच जाते हैँ।
जनपद में जो श्रमिक आ रहे हैं। उनको होम क्वारंटीन किया जा रहा है। हालांकि होम क्वारंटीन से पहले उनका थर्मल स्क्रीनिंग कराया जाता है। साथ ही लगातार उनपर निगाहें रखी जा रही है। जो संदिग्ध लगेगा, उसे क्वारंटीन सेंटर में रखा जाएगा। - पारसनाथ मौर्य, एसडीएम