फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुर्दों की बीमारी में न बरते लापरवाही

Sun, 07 Jun 2015 07:06 PM IST
badaun
विज्ञापन
विज्ञापन
गुर्दों की गंभीर खराबी का कोई इलाज नहीं है। इसका आहार परिवर्तन तथा दवाओं द्वारा इलाज किया जाता है। लिहाजा गुर्दे की बीमारी को इग्नोर करने की बजाए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ताकि बीमारी को जल्द समझ कर ट्रीटमेंट शुरू किया जा सके। यह विचार वरिष्ठ चिकित्सक गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय वाजपेयी ने एक गोष्ठी में कहे।
विज्ञापन

लालपुल स्थित एक होटल में गंगाशील अस्पताल बरेली की ओर से आयोजित गोष्ठी में बदायूं और बरेली से कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने भाग लिया। इसमें गुर्दों की गंभीर खराबी तथा शीघ्र निदान क्यों जरूरी है विषय पर चर्चा की गई। गंगाशील हॉस्टिपटल से आए सीनियर डॉ. वाजपेयी ने गुर्दों की खराबी संबंधी लक्षणों के बारे में बताया। कहा शरीर में सूजन जैसे ही हाथ, चेहरे तथा पाव में सूजन, यूरिन करने की आवृत्ति में बदलाव, बहुल पेशाब आना तथा कमजोरी अनुभव करना, सिरदर्द तथा संभ्रम, चक्कर आना, भूख कम लगना, दम फूलना, त्वचा पर चुभन महसूस करना ये लक्षण हैं। बताया कि ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर्स से सलाह लेनी चाहिए। बताया कि गुर्दों के अंतिम चरण की रेनल खराबी कहा जाता है, तब सप्ताह में कई बार डायलेसिस किए जाने की आवश्यकता होती है। जरूरत पडने पर गुर्दों के प्रत्यारोपण पर भी एक विकल्प के रूप में विचार किया जा सकता है।
यूरोलॉजिस्ट डॉ. लक्ष्मण स्वरूप (एमसीएच) ने यूरिन में खून आने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कई अति विशिष्ठ मरीजों के इलाज के वीडियो भी प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रस्तुत किए। करीब डेढ़ घंटे की चली गोष्ठी मेें डॉ. एमके जौहरी, डॉ. एससी नौगरिया, डॉ. सीके जैन, डॉ. रविंदर सिंह आदि मौजूद रहे। गंगाशील अस्पताल के निदेशक एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार गोष्ठी का आयोजन आगे भी होता रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें