बदायूं। फिरौती के लिए अपहरण के 21 साल पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमारी रिंकू ने दो आरोपियों पर दोष सिद्ध किया है। उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
उसावां थाना क्षेत्र के गांव गौतरा निवासी रामस्वरूप पुत्र पुत्तू लाल ने 13 जनवरी 2004 को मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उसके बड़े भाई नन्हे व रामभरोसे खेत में गेहूं व मसूर की रखवाली करके घर आ रहे थे। रास्ते में गाैतरा व बौरा के बीच में रात करीब आठ बजे चार-पांच बदमाश मिले और दोनों भाइयों को पकड़कर ले जाने लगे। बड़े भाई नन्हे बदमाशों के चंगुल से किसी तरह छूटकर भागे। रामभरोसे को बदमाश पकड़कर ले गए।
पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ अपहरण की धारा में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। विवेचना के दौरान 25 जनवरी 2004 को शाहजहांपुर के थाना परौर पुलिस ने मुठभेड़ में अपहृत रामभरोसे को बरामद कर लिया। साथ ही एक बदमाश इकरार को असलहा के साथ गिरफ्तार किया। विवेचना में घटना को अंजाम देने वाले जयसिंह, पूरन व मनीश के नाम प्रकाश में आए। अभियुक्त इकरार थाना परौर वाले मुकदमे में जमानत पर रिहा होने के बाद फरार हो गया। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना से संबंधित सभी साक्ष्य संकलन करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया गया। सुनवाई के दौरान अभियुक्त जयसिंह की मौत हो गई। इकरार की पत्रावली को अलग कर दिया गया। तब से मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन था। बुधवार को मुनीश एवं पूरन को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।