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कछला घाट रहा गुलजार

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पुरुषोत्तम मास में दान-पुण्य का फल अधिक अर्जित होगा, ऐसा मानने वालों की संख्या कम नहीं है। ऊपर से बच्चों की छुट्टियां चल रही हैं तो वह भी लुत्फ उठाने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते। पिकनिक और पुण्य के अनूठे संगम का साक्षी बना कछला गंगाघाट रविवार को गुलजार नजर आया।
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कछला गंगाघाट पर डुबकी लगाते वक्त यूं तो अनगिनत महिला-पुरुष आस्था से सराबोर नजर आए, लेकिन नहाते समय बच्चों की मस्ती देख यही लगा कि खासकर मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों के लिए यहां पहुंचना काशी और हरिद्वार से कम नहीं है। मुजरिया क्षेत्र के गांव बसावनपुर से पहुंची महिला श्रद्धालुओं की टोली ने तो डुबकी लगाते वक्त मंगलगीत गाकर जीवनदायनी का गुणगान भी किया। टोली में शामिल महिला हीरावती ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के दिन हैं। स्नान कर पूजा-अर्चना का फल भी अर्जित होगा।
श्रद्धालुओं की भीड़ में शामिल बरेली में रामपुर गार्डन इलाके के शिवम ने अपनी वृद्ध नानी को कासंगज जिले के सोरों क्षेत्र के गांव होडलपुर से लाकर स्नान कराया तो वह गंगा में पिकनिक जैसा लुत्फ उठाता मिला। शिवम ही नहीं तमाम ऐसे लोग भी दिखे जो आए तो बच्चों की जिद पूरी करने के लिए, लेकिन घाट पर आस्था से सराबोर हो गए। उन्होंने साधु-संतों को दान-दक्षिणा भेंट कर पुरुषोत्तम मास में धार्मिक कार्यक्रम संपन्न कराए। बिल्सी के बांकेलाल पान वालों ने तो पूरे-परिवार के साथ घाट पर हवन-पूजन भी कराया।
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राजस्थानियों में सर्वाधिक क्रेज
पुरुषोत्तम मास में गंगातट पर पहुंचे श्रद्धालुओं में राजस्थान के महिला-पुरुषों की संख्या सर्वाधिक दिखी। राजस्थान के धौलुपर निवासी श्रीनिवास ने बताया कि शनिवार को सोरों जी में पूजा-अर्चना की। रविवार को कछला आकर गंगा स्नान किया है। भरतपुर के राजन ने तो कन्या को भोज भी कराया।


गंगोत्री से गंगा सागर तक जीवनदायनी के किसी भी तट पर स्नान का महत्व बराबर है। पूजा-अर्चना का प्रतिफल जरूर मिलता है लेकिन अधिमास (पुरुषोत्तम मास) में यह कई गुना बढ़ जाता है। - हरीओम दास शर्मा, आश्रम स्वामी।
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