उसका ख्वाब कटरी किंग बनने का था, गांव-गांव फायरिंग करके दहशत फैलाना उसकी आदत में शुमार था। करीब 20 दिन पहले लूट के मामले में जेल से जमानत मिलने के बाद से पैरहा का कल्लू यादव कुख्यात बनकर लोगों के सामने था। दातागंज पुलिस सब कुछ जानते हुए भी उस पर हाथ नहीं डाल रही थी। खौफजदा लोग कल्लू यादव के खिलाफ थाने जाने से भी डरते थे। नामचीन मक्खन पहलवान का बेटा दस्यु कलुआ की राह पर चलना चाहता था। इस वजह से वह दुस्साहसिक वारदातों को अंजाम देने लगा।
वाकया करीब 10 महीने पहले का है, कल्लू यादव ने अपने पांच साथियों के साथ भीकमपुर गांव के पास सरेशाम तांगा-बुग्गी सवार एक दर्जन लोगों से राहजनी की थी। पड़ेली गांव के लक्ष्मण सिंह समेत कुछ लोगों ने कल्लू और उसके साथी मोरपाल को पकड़ कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। इसके बाद से कल्लू जेल में था। 20 दिन पहले ही वह जमानत पर छूटा था। इसके बाद से उसने इलाके में आतंक की जो इबारत लिखनी शुरू की वह बिनावर में दरोगा सर्वेश यादव की शहादत तक पहुंच गई।
जमानत पर छूटने के बाद सबसे पहले उसने मुढ़ा घाट पर दिनदहाड़े फरीदपुर के पशु व्यापारी चीना से 3.50 लाख रुपये की लूट की। इसके बाद कल्लू यादव ने समरेर बाजार में सराफ से रंगदारी मांगी और दहशत फैलाने के लिए फायरिंग की। पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन कार्रवाई शून्य रही। 15 जून को कल्लू ने बझेड़ा गांव में पूर्व प्रधान चरन सिंह के भतीजे के अपहरण की कोशिश की। 21 जून को कल्लू ने सरेशाम जाधवपुर गांव के बाइक सवार दंपति से भीकमपुर के पास लूटपाट की थी। ग्रामीणों के आने पर फायरिंग करता हुआ भाग गया था। इसी दिन पड़ेली गांव पर लक्ष्मण सिंह की हत्या की नीयत से धावा बोल दिया था। यहां करीब दो घंटे तक फायरिंग भी हुई थी।
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15 बीघा जमीन और मकान लगाया ठिकाने
दातागंज। कल्लू यादव के पिता मक्खन सिंह यादव इलाके के नामचीन पहलवान थे। मक्खन सिंह यादव के पुत्रों में शिशुपाल यादव और कल्लू यादव में कल्लू शुरू से ही बिगडै़ल था। उसका आपराधिक किस्म से लोगों से नाता था। पिता की मौत के बाद कल्लू ने अपने हिस्से की 15 बीघा जमीन और मकान भी बेच दिया था। उसकी शादी नहीं हुई है। ऐसे में परिवार से भी ज्यादा ताल्लुक नहीं रखता था। कल्लू ने जरायम की दुनिया में ऐसा कदम रखा कि अब उसका सलाखों से बाहर आना मुश्किल है।
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पीलीभीत, शाहजहांपुर, बरेली मुरादाबाद में भी मुकदमे
दातागंज। कल्लू यादव के खिलाफ बदायूं के साथ शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद और पीलीभीत में भी लूट, रोड होल्डअप, राहजनी और हत्या के मामले दर्ज हैं।
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आखिर कौन है कल्लू यादव का सरपरस्त
मथुरा की तरह बदायूं में एक साहसी दरोगा हुआ शहीद
बलराम शर्मा
बदायूं। ये महज संयोग है लेकिन रामवृक्ष यादव और कल्लू यादव की कहानी में कुछ समानताएं हैं। यह भी बात सामने आ रही है कि दोनों ने अपनी बिरादरी को अपने साथ जोड़ कर अपना आतंक बनाने की कोशिश की। कल्लू को यादव बहुल गांवों में ही संरक्षण मिलता था। यह बात कही जा रही है कि उसे खाकी और खादी पहने अपने बिरादरी के ही कुछ लोगों का संरक्षण प्राप्त था लेकिन किसका यह कोई नहीं बता रहा है। यह भी संयोग है कि इन दोनों की वजह से दो साहसी दरोगा एसओ संतोष यादव और सर्वेश यादव शहीद हो गए और दोनों की इसी जाति को थे।
कहने को तो इसे महज इत्तफाक भी कहा जा सकता है, लेकिन कहीं न कहीं खाकी और खादी के गठजोड़ से अपराधियों के पनपने की बात सामने आ रही है। मथुरा के जवाहर बाग कांड के पीछे खादी का कनेक्शन पहले ही सामने आ चुका है। जवाहर बाग में सत्याग्रह के नाम पर कब्जा जमाए रामवृक्ष यादव को पुलिस-प्रशासन का खौफ नहीं था। कारण, उसको सूबे की सरकार अपनी लगती थी। इसी के बल पर वह बेखौफ होकर पुलिस से भी भिड़ गया। उस वक्त एसओ संतोष यादव ने यादव कनेक्शन के चलते दिलेरी दिखाई थी, लेकिन वह भीड़ के मंसूबों को नहीं जान सके और अपनी जान गवां बैठे।
बुधवार को बिनावर में हाइवे पर बदमाश होने की सूचना पर एसआई सर्वेश यादव ने दिलेरी दिखाई, वह बगैर फोर्स लिए बदमाशों की तलाश में निकल गए। चेकिंग की, तो सफेद अपाचे पर तीन संदिग्ध लोग आते दिखे। वे जब रोकने पर नहीं रुके तो प्राइवेट गाड़ी पर अपने हमराह सिपाही प्रमोद को लेकर पीछे लगे गए। बाइक पर सवार शातिर कल्लू यादव भी बेखौफ था। उसने गोली चला दी। इस रियल मुठभेड़ में सर्वेश यादव शहीद हो गए और सिपाही घायल। हालांकि कल्लू भी घायल हो गया, लेकिन उसके दो साथी भागने में सफल हो गए थे। आईजी कहते भी हैं कि पुलिस बिना तैयारी के पहुंची। अति उत्साहित सर्वेश यादव अपराधियों के शिकार हो गए।
ाजपा जिलाध्यक्ष हरीश शाक्य कहते हैं कि सपा सरकार में जाति और परिवारवाद सिर के चढ़ के बोलता है। अधिकतर थाने पर जाति विशेष के लोगों की तैनाती होती है। सपा सरकार आने पर अपराधी और अराजकतत्व बेलगाम हो जाते हैं। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ओमकार सिंह कहते हैं कि सपा की सरकार में अधिकारी से लेकर चपरासी तक यादव को बनाए जाने को तरजीह दी जाती है। कानून नाम की चीज नहीं रहती। पुलिस पिटती है। हमलों में मारी जाती है। एक हत्यारोपी यादव को पीटने के कारण एसपी तक को सस्पेंड कर दिया जाता है। आखिर इसका अपराधियों में क्या संदेश जाएगा?