बदायूं। ककोड़ा मेला शुरू होने में मात्र चार दिन शेष हैं, लेकिन जिला पंचायत की ओर से सड़क बनाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। हालात ये हैं कि अब तक कच्ची सड़क की आधी भी दूरी सही से पूरी नहीं हो सकी है। कच्ची सड़क पर हर तरफ धूल के गुबार उड़ रहे हैं और धूल को उड़ने से रोकने के लिए सिर्फ एक टैंकर के माध्यम से पानी का छिड़काव कराया जा रहा है, जबकि हर साल अब तक 10 से 12 टैंकर लगाए जाते थे। इस धूल की वजह से वहां पर पहुंचे दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रुहेेलखंड का प्रसिद्ध मेला ककोड़ा मेला पांच नवंबर से शुरू हो रहा है। इसको लेकर तैयारियों जोरों पर चल रही है। हालांकि ये तैयारियां मौके पर दिखाई न देकर सिर्फ कागजों में ज्यादा चल रही हैं। दीपावली से पूर्व मेले की मुख्य सड़क बनाने का काम शुरू किया गया था, ऐसे में जिला पंचायत के अधिकारियों की ओर से दावा किया जा रहा था कि सड़क बनाने का काम दीपावली तक पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन दीपावली को निकले पांच दिन बीत चुके हैं, इसके बावजूद आज तक ये सड़क पूरी नहीं हो सकी। अमूमन जब कच्ची सड़क बनाई जाती है, तो उस पर कई दिनों तक पानी का लगातार छिड़काव कराया जाता है, ताकि मिट्टी वहीं पर दब जाए, लेकिन अब तक जिला पंचायत की ओर से वहां पर ऐसा कोई इंतजाम नहीं किया गया है। खानापूूर्ति के लिए एक टैंकर ही लगाया गया है, जबकि अमूमन हर साल इस काम के लिए 10-12 टैंकर लगाए जाते थे। ऐसे में वे दुकानदार भी परेशान हो रहे हैं जो अपनी दुकानें लगाने वहां तक पहुंच रहे हैं।
सड़क पर गड्ढे, हो सकता है हादसा
नौशेरा से गंगपुर (कासगंज सीमा) तक रोड साइड की पटरी भी उखड़ चुकी है। वहीं मेले में प्रवेश से पूर्व ही ओम नगरिया चौराहे के पास रोड पूरी तरह से टूटा हुआ पड़ा है। वहां पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। अगर मेला शुरू होने से पूर्व इनको सही नहीं कराया गया, तो मेले के समय हादसा भी हो सकता है। क्योंकि मेले के समय में दिन के अलावा रात में भी श्रद्धालुओं को रेला निकलता रहता है।
मेले के गोदाम से सामान गायब
मेला ककोड़ा के लिए कादरचौक में तीन गोदाम बनाए गए थे, जिनमें लकड़ी के सामान, लोहे के गार्डर समेत अन्य सामान रखा रहता था, लेकिन देखरेख के अभाव में हल्के-हल्के गोदामों से ये सामान गायब हो गया, साथ ही गोदाम की बिल्डिंग भी खस्ता हालात में पहुंच गईं। दरअसल इस सामान का उपयोग मेले में उस समय किया जाता था, जब कादरचौक से लेकर गंगा तक कच्चा रास्ता बनता था। तब कादरचौक में ही सुतिया पुल पर गाडर बल्ली डालकर पुल बनाया जाता था। तब सुतिया का टैक्स भी लगता था।
टेंट लगना शुरू, पर सुरक्षा के लिए नहीं पहुंची पुलिस
मेला ककोड़ा में टेंट लगना शुरू हो गए, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए अब तक बदायूं की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है। ऐसे में अगर वहां पर कोई घटना होती है, तो उसके जानकारी भी पुलिस को समय से नहीं हो सकेगी। हालांकि कासगंज की चौकी क्षेत्र से यहां रात में गश्त की जाती है।
लाखों की भीड़, मात्र दो हजार की क्षमता वाला बनेगा पंडाल
मेले में जहां लाखों की संख्या मे श्रद्धालु पहुंचते है और कल्पवास करते है। उनके मनोरंजन के लिए मेले में मात्र एक सांस्कृतिक पंडाल लगाया जाता है, जिसकी क्षमता मात्र दो हजार लोगों की रहेगी। ऐसे में लोगों को पंडाल में बैठने के लिए जगह तक नसीब नहीं हो पाएगी।