रात में मेला ककोड़ा का सन्नाटे में डूबा बाजार। संवाद
कादरचौक। मेला ककोड़ा 12 नवंबर को संपन्न हो जाएगा। केवल आसपास गांवों के लोग ही मेले में रौनक बनाए हुए हैं। पिछले दो दिन से आसपास क्षेत्र के लोग यहां पहुंचकर जमकर खरीददारी कर रहे हैं। समापन ज्यों-ज्यों करीब आ रहा है, मेेले की रौनक कम होती जा रही है।
दो दिन चली बंपर बिक्री के बाद अब दुकानदारों को भी अधिक बिक्री का भरोसा नहीं रह गया है। आसपास के लोग दिन में मेला क्षेत्र में आ जाते हैं और शाम ढलते ही घर लौट जाते हैं। यही वजह है कि दिन में तो मेले में काफी चहलपहल रहती है, तो वहीं रात में सन्नाटा छा जाता है। प्रकाश व्यवस्था भी कम हो गई है। इससे जंगल में दुकानदार अपने को असुरक्षित भी महसूस करने लगे हैं।
गंगा तट पर लगने वाला मेला ककोड़ा पूर्णिमा को सबसे अधिक भीड़ वाला क्षेत्र बना रहा। इसके बाद केवल दो दिन सबसे ज्यादा रौनक रही। मेला में दूज से कल्पवासियों की वापसी होने लगी। इसके बाद मेला को आसपास के गांवों के लोगों ने रौनक प्रदान की। आसपास के लोग भी पिछले दो दिनों में अपनी जरूरतों की चीजें लगभग खरीद चुके हैं, जो रह गए हैं, वे दिन में पहुंचने के बाद रात को घर पहुंच जाते हैं।
बता दें कि 12 नवंबर तक ही मेले की अनुमति है। इसके बाद मेला की कोतवाली भी चली जाएगी। कासगंज की जगह में मेला लगता है और बदायूं की जिला पंचायत इसका संचालन करती है। मेला समाप्त हो जाने के बाद मेले का पूरा परिसर कासगंज प्रशासन के पास पहुंच जाएगा।
रात में मेला ककोड़ा का सन्नाटे में डूबा बाजार। संवाद