प्रशासनिक अधिकारियों ने लिया जायजा, ककोड़ा मेला का स्थल हुआ चयन
रूहेलखंड का मिनी कुंभ कहलाए जाने वाला ककोड़ा मेला की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बृहस्पतिवार को गंगा तट पर पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थलीय जायजा लिया। इस बार स्थान बदलते हुए मेला करीब एक किमी पश्चिम की ओर हटा है। हालांकि कादरचौक की तरफ गंगा की धार तीन सौ मीटर बढ़ी है। लेकिन मेला स्थल का जो चयन हुआ है। वहां तक जाने के लिए कच्चे मार्ग की दूरी बढ़ाई जाएगी।
प्रसिद्ध मेले के लिए गोताखोरों ने गंगा में कई मीटर तक घुमकर गंगा का जलस्तर का देखा। इसके अलावा मेले के लिए बनाई जाने वाली कच्ची सड़क के विषय में भी जानकारी की। मेला बैरियर पार्किंग व्यवस्था समुचित रखने के लिए एसपी सिटी अनिल यादव ने निर्देश भी दिए। वहीं एडीएम अजय श्रीवास्तव ने मेला के सिविल लाइन क्षेत्र में पानी की गहराई होने की वजह से बैरीकेडिंग के साथ ही घाट पर समुचित प्रकाश व्यवस्था के लिए कहा गया। पुराने मेला का मानचित्र देख व्यवस्थाओं को समय से पूरा करने के लिए कहा गया। एक्सीएन जल निगम अनिल वर्मा को भी पानी नियंत्रण के लिए भी कहा। इस अवसर पर एसडीएम जंगबहादुर यादव, तहसीलदार राजेंद्र प्रसाद चौधरी, हरिपाल सिंह यादव, अभियंता संजय शर्मा, लालता प्रसाद कश्यप, विनोद कुमार, चरन सिंह, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।
डीएम करेंगे मॉनिटरिंग
कादरचौक। डीएम पवन कुमार मेले की मॉनिटरिंग करेंगे। बता दें कि 2010 में सदर एसडीएम रहते हुए मेलाधिकारी रह कर पवन कुमार ने सकुशल मेला संपन्न कराया था। उस वक्त अक्तूबर में भीषण बाढ़ आई हुई थी। कादरचौक तक गंगा बह रही थी। सैकड़ों गांव खाली होने के साथ लोग बेघर हो गए थे। ऐसे में मेला भी एक माह बाद ही था। सड़कें भी टूट चुकीं थीं। मेला स्थल पर खराब हो गया था। लेकिन कार्यकुशलता के चलते सब कुछ व्यवस्थाएं दुरूस्त कराकर मेले को भव्यता प्रदान की गई थी। इस बार भी पुन: डीएम के रूप में मेले की तैयारियों पर पवन कुमार की पैनी नजर रहेगी।
सात से 21 नवंबर तक चलेगा मेला
कादरचौक। ककोड़ा मेला सात नवंबर से 21 नवंबर तक चलेगा। सात को ककोड़ा देवी मंदिर से झंडी पूजन कर ककोड़ा देवी मेला में झंडा स्थापना कर मेले का आरंभ होगा। 13 को मेले का उद्घाटन किया जाएगा।