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‘गंगा मैया माफी देइदो, फिर आवंगे द्वार तुम्हारे’

Fri, 27 Nov 2015 11:39 PM IST
अमर उजाला, बदायूं
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मुख्य स्नान पर्व पर वापसी जैसा माहौल गंगा किनारे शुक्रवार को भी दिखाई दिया। मेला ककोड़ा में कल्पवासी भी अपने तंबू-डेरे समेटकर वापसी करने लगे। टैक्टर ट्राली, बैलगाड़ी और तांगे बुग्गी आदि वाहनों से वापसी हुई तो जगह-जगह जाम की स्थिति पैदा हुई। शुक्रवार को द्वितीया में वापसी इसलिए अधिक हुई कि पड़वा को कल्पवासी वापसी नहीं करते हैं। कल्पवासियों की वापसी के साथ ही आसपास के गांव और पुल बन जाने के बाद गंगा पार के गांवों के भी ग्रामीण मेला में पहुंचे। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के इस बड़े मेला में घूमने का आनंद लिया। इससे पूर्व गंगा में डुबकी लगाकर प्रसाद भी बांटा।
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मीना बाजार में सबसे अधिक भीड़
कादरचौक। बहुरियों और बिटियों ने यहां का मीना बाजार शुक्रवार को भी गुलजार रखा। क्रीम, पाउडर और लिपिस्टिक आदि खरीदी। चोटियां, रुमाल और अंग वस्त्र भी खूब खरीदे गए। गांव की चाची और ताइयों ने भी खरीददारी में इनका सहयोग किया।

मेला पर बरेली वालों से हुआ विवाद
कादरचौक। मेला में बरेली बस्ती के लोगों से टिकट के दामों को लेकर विवाद हो गया। इससे बीतीरात वहां तनाव की स्थिति पैदा हो गई लेकिन बाद में पुलिस के पहुंच जाने के बाद मामला शांत हो गया।
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सजे रह गए मंडलीय अधिकारियों के कैंप
कादरचौक। इस बार मिनी कुंभ, मेला ककोड़ा में मंडलीय प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी नहीं पहुंचने से उनके लिए जिला पंचायत से तैयार कराए गए स्विस कॉर्टेज समेत आलीशान कैंपस ऐसे ही पड़े रहे। मेला कम हो जाने के बाद जिला पंचायत का भी कैंप कार्यालय सन्नाटे में डूबा रहा।

अंतिम दिनों में नहीं माने जुआरी
कादरचौक। पड़वा की रात मेला ककोड़ा में जुआरियों के जमकर फड़ लगे। खुलेआम लाखों के बारे-न्यारे हो गए। शुरूआत में दिखाई गई सख्ती पड़वा वाले दिन काम नहीं आई। मेला से अधिकांश पुलिस और सुरक्षा बल इसी दिन वापस बुला लिया गया। पुलिस बल का उपयोग पंचायत चुनाव में भी किया जाना था।

मेला की जीडी अबतक निल
कादरचौक। मेला ककोड़ा शांति पूर्वक हो गया। इसकी मिसाल बनी है ककोड़ा मेला कोतवाली की जीडी। मेला ककोड़ा की कोतवाली की जीडी में एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है।   

मेला में सेवा के लिए पुरस्कृत हुए स्काउट्स
मेला ककोड़ा। स्काउट संस्था के तत्वावधान में चल रह खोया-पाया शिविर में अबतक स्काउट की टीमों ने 317 बच्चों और बुजुर्गों को उनके परिवार से मिलाया। डूबने को बचाने, उठाईगीरों, मनचलों पर पैनी नजर रखने वाले और मेले में श्रेष्ठ अनुशासन बनाने में श्रीदाताराम इंटर कॉलेज ललुआनगला, असरासी का स्काउट दल सर्वश्रेष्ठ और कुंवर रूकुम सिंह कॉलेज द्वितीय स्थान पर रहा। जिला मुख्यायुक्त महेश चंद्र सक्सेना ने गोल्ड मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
जिला संगठन कमिश्नर प्रवेश कुमार सिंह राठौर, राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान प्राप्त कृपाल सिंह, जिला ट्रेनिंग कमिश्नर संजीव कुमार शर्मा के नेतृत्व में स्काउटस् ने मेले से लौटने से पहले गंगा किनारे सफाई अभियान चलाया। श्रद्धालुओं द्वारा गंगा तट पर फैलाई गई गंदगी को एकत्रित कर दूर फिकवाया। मूर्तियों को गढ्ढा खोद कर दबाने का सर्वोत्तम कार्य किया। अनुशासन में अहम जिम्मेदारी निभाने वाली श्री दाताराम मैमोरियल कालेज ललुआनगला असरासी को प्रथम, कुंवर रूकुम सिंह कालेज को द्वितीय और अहिल्याबाई कालेज, भगवान परशुराम कालेज, पं. श्रीराम वाजपेयी स्काउट दल, युवक रोवर क्रयू, शिव शंकर स्वतंत्र स्काउट दल उझानी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

गायत्री परिवार ने चलाया गंगा सफाई अभियान, दीप जलाए
मेला ककोड़ा। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में चलाए जा रहे निर्मल गंगा जन अभियान के अंतर्गत गायत्री परिजनों ने गंगा को स्वच्छ बनाने का संकल्प लेते हुए गंगा तट पर सफाई अभियान चलाया। गायत्री परिवार के सुरेंद्र नाथ शर्मा ने मंत्रोच्चारण कर मां गंगा की पूजा अर्चना कराई। श्रद्धालुओं ने लोक कल्याण के लिए गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र की विशेष आहुतियां समर्पित की। मां गंगा के विराट स्वरूप की आरती की। रघुनाथ सिंह के नेतृत्व में रामवीर, रामकिशन कश्यप, राहुल ने मेला ककोड़ा में साईकिलों से भ्रमण कर श्रद्धालुओं को गंगा स्वच्छ बनाने के प्रति जागरूक किया। गायत्री परिवार के प्रमोद पाठक की टीम ने गंगा किनारे अभियान चलाया। स्नान करने आये लोगों को सफाई बनाए रखने का आह्वान किया।  निर्मल गंगा जन अभियान के जिला संयोजक सुखपाल शर्मा ने कहा कि निर्मल गंगा के अविरल प्रवाह से भारतीय संस्कृति और सभ्यता जुड़ी है। गंगा मां है और मां का संरक्षण ही जीवन दे सकता है। प्रकृति की गोद में खेले कूदें लेकिन उसकी अनुपम सौंर्दयता को कम न होने दें है। रामचंद्र प्रजापति और सुरेंद्रपाल सिंह सिसौदिया ने कहा कि मृत शरीर, कचरा, वासी फूल, नलों का जल-मल, प्लास्टिक आदि को गंगा में प्रवाहित न करें।
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