उझानी (बदायूं)। नलों से निकल रहे दूषित पानी और पीलिया के प्रकोप से परेशान नरऊ गांव के लोगों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। प्रशासन की लापरवाही से गुस्साए ग्रामीण सोमवार को परिवार सहित धरने पर बैठ गए। बच्चों ने स्कूल जाने का बहिष्कार कर दिया। इसका पता लगने पर प्रशासन में खलबली मच गई। मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर के समझाने पर ग्रामीण मानने को तैयार नहीं थे। करीब चार घंटे बाद एसडीएम ने उझानी कस्बे का पानी नरऊ तालाब के बजाय नया नाला बनाकर खेतों की सिंचाई में इस्तेमाल करने का आश्वासन दिया। कहीं तब जाकर ग्रामीण माने और दोपहर बाद धरना समाप्त कर दिया।
नरऊ ग्रामीण सोमवार सुबह करीब नौ बजे परिवार समेत प्राथमिक विद्यालय परिसर के बाहर इकट्ठे हुए और धरना प्रदर्शन शुरू किया। अधिकतर ग्रामीणों ने अपने बच्चों को स्कूल भी नहीं भेजा। छह-सात बच्चे स्कूल पहुंचे थे, जो प्रधानाध्यापक रितु अग्रवाल से यह कहकर लौटे गए कि तालाब के गंदे पानी से निजात मिलने तक वे स्कूल नहीं आएंगे। स्कूल में पंजीकृत छात्रों की संख्या 144 है। नरऊ में धरना शुरू हो जाने की जानकारी अफसरों को लगी तो खलबली मच गई। पीडब्ल्यूडी और पालिका के अफसरों को साथ लेकर एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य मौके पर जा पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले तालाब के आसपास का इलाका देखा। इसके बाद ग्रामीणों को समझाने के इरादे से धरनास्थल की ओर गए। उन्हें देखते ही ग्रामीणों ने नारेबाजी तेज कर दी। ग्रामीणों से वार्ता के पहले दौर में दोपहर तक कोई समाधान नहीं निकला, जिससे एसडीएम मौके से चले गए। अपराह्न करीब दो बजे एसडीएम दोबारा नरऊ गए। उनके साथ शेखूपुर विधायक धर्मेंद्र शाक्य और बदायूं पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल भी थे। एसडीएम ने बातचीत के दौरान धरने पर बैठे ग्रामीणों को आश्वस्त कर दिया कि दो-तीन दिन के अंदर उझानी के नाले के पानी को दूसरी तरफ पहुंचाने के लिए नया नाला बना दिया जाएगा। इसके बाद उझानी कस्बे के गंदे पानी का इस्तेमाल खेतों की सिंचाई में किया जाएगा। उनकी बात पर विश्वास करके ग्रामीण मान गए और धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया।
उझानी कस्बे का गंदा पानी नरऊ के तालाब में जाता है, जिससे गांव के नलों में दूषित पानी आ रहा है। दूषित पानी पीने से गांव में पीलिया फैला है, जिससे अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग बीमार चल रहे हैं, जिनमें तीन की हालत गंभीर है। चार लोगों की मौत होने के बावजूद अफसर समस्या का समाधान के नाम पर गांव में चक्कर लगाकर लौट जाते थे। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति खासा गुस्सा था।
ग्रामीणों को पहले धमकाया, फिर समझाया
उझानी। एसडीएम समेत पालिका और पीडब्ल्यूडी के अफसर धरनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने पहले तो ग्रामीणों पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन बाद में ग्रामीणों की बात रख रहे कोटेदार महेंद्र पर अफसरों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया। कोटेदार को तो एसडीएम की कार में भी बैठा लिया गया। यह देख धरनास्थल पर मौजूद महिला-पुरुष भड़क गए। ग्रामीणों के गुस्से को देख अफसर नरम पड़े और कोटेदार को कार से उतार कर घर भेज दिया।
पालिका ने टैंकर में भेजा गंदा पानी, ग्रामीणों ने लौटाया
उझानी। नगर पालिका परिषद की ओर से रोज की तरह शनिवार को पानी का जो टैंकर भेजा, उसके दोनों ढक्कन खुले थे। ग्रामीणों में नरेश ने अंदर झांका तो पानी में गंदगी उतारती देख कुछ लोगों को बुला लिया। टैंकर चालक से ग्रामीणों की नोकझोंक भी हो गई। इसके बाद रविवार को गांव में पानी का टैंकर नहीं पहुंचा। सोमवार सुबह टैंकर पहुंचा तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए ग्रामीणों ने पानी के टैंकर को लौटा दिया। इसकी शिकायत उन्होंने पालिका अफसरों से भी की।
मलिकपुर में भी फैलने लगा पीलिया
उझानी। नरऊ में फैला पीलिया खत्म नहीं हुआ कि उससे सटे गांव मलिकपुर में सोमवार को पीलिया के तीन मरीज सामने आ गए। इनमें चरन सिंह (45), महावीर (40) और जुगेंद्र (25) के परिजन की मानें तो दो दिन पहले ही उन्होंने निजी लैब पर परीक्षण कराया है। परीक्षण के बाद घरवाले फिलहाल तीनों का देशी इलाज करवा रहे हैं। इधर, नरऊ निवासी हेपेटाइटिस बी के तीनों मरीजों का हाल जानने के स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई भी डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने विधायक से बात की तो विधायक ने सीएमओ से बात कर उन्हें समुचित इलाज मुहैया कराने भरोसा दिलाया।
नया नाला फिलहाल कच्चा होगा। अगर कोई दिक्कत नहीं आई तो बाद में उसे पक्का करवा दिया जाएगा। तब तक ग्रामीणों को पालिका के टैंकर के जरिए पानी मुहैया कराया जाता रहेगा।
- पारसनाथ मौर्य, एसडीएम।