कार्यशाला में उर्दू अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. यासीन उस्मानी ने अभिभावकों में जागरूकता की कमी और अशिक्षा को जिम्मेदारी मानते हुए कहा कि लोग स्वास्थ्य कार्यक्रमों और टीकाकरण के महत्व को समझें। मुफ्ती शमशाद हुसैन रिजवी, मदरसा दारूल उलूम के मोहतमिम अब्दुल सूरल कादरी, आचार्य वेदव्रत आर्य, ककराला ईदगाह के इमाम हाफिज रफी अहमद, वेदभानु आर्य, इस्लामियां इंटर कालेज के प्रवक्ता अब्दुल सुबूर खान, बिल्सी ईदगाह के इमाम मौलाना उस्मान, सहसवान के ख्वाजा हमीद उद्दीन कादरी सहित यूनीसेफ के सुभाष सिंह, फरदीन खान, नरेेंद्र शर्मा, यामीन उस्मानी तथा हसरत अली और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आरएन हरित मौजूद रहे।
क्या है आईवीपी इंजेक्शन
बदायूं। आईवीपी इंजेक्शन कोई नया नहीं है, 1955 से कई देशों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्ष 2006 से भारत में भी यह निजी चिकित्सालयों में उपलब्ध है, लेकिन अब माह नवंबर से सभी सरकारी अस्पतालों में भी नि:शुल्क उपलब्ध हो जाएगा। इस इंजेक्शन को नियमित टीकाकरण में शामिल किया जाएगा। काली खांसी, गला घोंटू, टिटनेस की रोकथाम के लिए तो पहले से ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीकाकरण किया जाता रहा है लेकिन अब हेपीटाइटिस बी और निमोनिया से सुरक्षा को पेन्टा बेलेन्ट नामक नया इंजेक्शन अगले वर्ष तक सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हो जाएगा। डीएम ने अभिभावकों को किया जागरूक
बदायूं। जिलाधिकारी ने कहा कि टीकाकरण पर अभिभावकों को जागरूक करते हुए कहा कि उन्हें इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में सहयोग करना चाहिए।