- जमात-ए-इस्लामी हिंद की ओर चलाया जा रहा जागरूकता अभियान
- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने बताया शरीयत कानून
जमात ए इस्लामी हिंद की ओर से चलाए जा रहे मुस्लिम पर्सनल लॉ जागरूकता अभियान के तहत सोमवार को नगर के अल फरिया हॉस्पिटल में सभा हुई। इसमें महिलाओं के अधिकार और शरीयत विषय पर मुख्य अतिथि मौलाना अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता डॉ. अरशद जमाल नदवी ने कहा कि कानून ए शरीयत को लेकर यह गलतफहमी फैलाई जाती है कि इस्लाम में औरतों को कमतर समझा जाता है, सच्चाई इसके विपरीत है। हम इस्लाम का अध्ययन करें तो पता चलता है कि इस्लाम ने महिलाओं को 14 सौ साल पहले वह मुकाम दिया, जो आज के कानून भी नहीं दे पाए।
उन्होंने कहा कि जिस वक्त बच्चियों को जिंदा मार दिया जाता था, उस वक्त हजरत मोहम्मद सलल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उन्हें जीने का अधिकार दिलाया। वर चुनने के मामले में इस्लाम ने स्त्री को यह अधिकार दिया है कि वह किसी के विवाह प्रस्ताव को स्वेच्छा से स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। इस्लामी कानून के अनुसार किसी स्त्री का विवाह उसकी स्वीकृति के बिना या उसकी मर्जी के विरुद्ध नहीं किया जा सकता। बीवी के रूप में भी इस्लाम औरत को इज्जत और अच्छा ओहदा देता है। कोई पुरुष कितना अच्छा है, इसका मापदंड इस्लाम ने उसकी पत्नी को बना दिया है। इस्लाम कहता है अच्छा पुरुष वहीं है जो अपनी पत्नी के लिए अच्छा है। यानी इंसान के अच्छे होने का मापदंड उसकी हमसफर है।
असहद जमाल नदवी ने कहा कि संपत्ति में अधिकार-औरत को बेटी के रूप में पिता की जायदाद और बीवी के रूप में पति की जायदाद का हिस्सेदार बनाया गया। यानी उसे साढ़े 14 सौ साल पहले ही संपत्ति में ये अधिकार दे दिया गया। मंडल अध्यक्ष अतीक अहमद शफीक इस्लाही, सरफराज अब्बासी, आमिर खान, इम्तियाज अहमद, आबिद अब्बासी, हम्माद इम्तियाज का विशेष योगदान रहा। मुख्य रूप से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य डॉ. यासीन उस्मानी, मौलाना तस्लीम मियां कादरी प्रबंधक मदरसा आलिया कादरिया, एडवोकेट सफीरउद्दीन बार एसोसिएशन बदायूं, मुफ्ती सगीर अहमद प्रबंधक मदरसा कुल्लीअतुल बनाक, डॉ. संजीदा आलम प्रदेश अध्यक्ष जमात ए इस्लामी हिंद और महिला प्रकोष्ठ की अस्मा इम्तियाज ने भी विचार रखे। रियाज अहमद ने सबका आभार प्रकट किया। संचालन डॉ. इत्तेहाद आलम और मोहम्मद मुस्लिम अंसारी ने किया।