थानों में पीड़ितों की फरियाद नहीं सुनी जाती यह आम चर्चा रहती है। मगर यहां तो थानेदार एसएसपी का आदेश भी नहीं मानते हैं। पीड़ितों की थानों में सुनवाई न होने पर पुलिस अधिकारियों के कार्यालय में प्रार्थना पत्रों का अंबार लगा रहता है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जनवरी से अब तक जिले के 21 थानों में 4,515 प्रार्थना पत्र लंबित हैं।
मंगलवार को एसपी सिटी कमल किशोर ने क्राइम मीटिंग के बाद जिले के सभी थानों में लंबित पड़ी शिकायतों को रिकार्ड निकाला तो सबसे ज्यादा फिसड्डी थाना सहसवान और कादरचौक निकला। सहसवान में 521 और कादरचौक थाने में 478 प्रार्थना पत्र लंबित मिले। इनके अलावा सिविल लाइंस में 339, उझानी में 335, बिल्सी में 329, बिसौली में 250, वजीरगंज में 201, कोतवाली में 193, दातागंज में 189, मूसाझाग में 178, अलापुर में 170, उघैती में 156, उसहैत में 138, जरीफनगर में 106, इस्लामनगर में 104, फैजगंज बेहटा में 75, बिनावर में 63, उसावां में 38, हजरतपुर में 57, कुंवरगांव में 36 और मुजरिया थाने में 35 प्रार्थना पत्र अधिकारियों के आदेश के बाद भी लंबित पड़े हैं।
जन शिकायत प्रकोष्ठ में प्रार्थना पत्रों का भंडार
पुलिस ऑफिस कार्यालय में आने वाले फरियादों की शिकायतों के निस्तारण को लेकर अधिकारी तो संजीदा दिखते है, लेकिन थानेदार इसे गंभीरता से नहीं लेते। थानों में सुनवाई नहीं होने की वजह से जन शिकायत प्रकोष्ठ कार्यालय में प्रार्थना पत्रों का भंडार लगा हुआ है। ऑफिस में काम करने वाले पुलिसकर्मी भी इससे परेशान हैं। सभी रिकार्ड उन्हें दुरुस्त रखने पड़ते है। पुलिस ऑफिस में ही एसएसपी चंद्रप्रकाश, एसपी सिटी कमल किशोर, एसपी देहात डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह, सीओ सिटी वीरेंद्र सिंह यादव, सीओ उझानी मुन्नालाल आदि के कार्यालय हैं।