बदायूं में एंटी करप्शन टीम (भ्रष्टाचार निवारण संगठन) ने बुधवार को शहर की नवादा पुलिस चौकी से हेड कांस्टेबल मनोज भार्गव को जमीन के मामले में दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। हेड कांस्टेबल के खिलाफ बिनावर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। मुकदमा दर्ज कराने के बाद एंटी करप्शन टीम आरोपी हेड कांस्टेबल को बरेली ले गई। वहां से बृहस्पतिवार को उसे जेल भेजा जाएगा।
मामला सिविल लाइंस थाने से जुड़ा है। आरिफपुर नवादा निवासी शादाब की मां ने विलालउद्दीन आदि को कुछ प्लॉट के बैनामे किए थे। इसके चलते शादाब को विलालउद्दीन से रुपये लेने थे। विलालउद्दीन रुपये देने से इंकार कर रहा था। रुपये न देने पड़े इसके लिए विलालउद्दीन ने नवादा चौकी पुलिस को शादाब के पिता के खिलाफ रुपयों के लेनदेन व मारपीट करने आदि के आरोप में तहरीर दी।
तहरीर मिलने के बाद चौकी पर तैनात हेड कांस्टेबल मनोज भार्गव शादाब पर ही पुलिस कार्रवाई करने का दबाव बनाने लगा। हेड कांस्टेबल ने शादाब के घर पर कई बार दबिश भी दी। इस दौरान हेड कांस्टेबल ने शादाब से कार्रवाई न करने के एवज में 20 हजार रुपये की मांग की। मांग पूरी न होने पर हेड कांस्टेबल लगातार शादाब को प्रताड़ित कर रहा था। इसके चलते शादाब ने हेड कांस्टेबल की शिकायत बरेली एंटी करप्शन टीम से की।
आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
बुधवार को एंटी करप्शन टीम प्रभारी प्रवीण सान्याल के नेतृत्व में बदायूं पहुंची। पहले से तय बातचीत के आधार पर शादाब नवादा पुलिस चौकी पहुंचा। उसने हेड कांस्टेबल मनोज भार्गव को दस हजार रुपये दिए। हेड कांस्टेबल ने जैसे ही रुपये जेब में रखे वैसे ही टीम ने उसे दबोच लिया। एंटी करप्शन टीम हेट कांस्टेबल के साथ चौकी इंचार्ज अनंत अमौरिया को भी बिनावर थाने ले गई। यहां मनोज भार्गव पुत्र रामशरण भार्गव निवासी गांव रायपुर थाना ईशा नगर जिला लखीमपुर खीरी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम निवारण के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
सिपाही के साथ नवादा चौकी इंचार्ज को भी पकड़कर ले गई थी टीम
एंटी करप्शन की टीम ने जिस समय चौकी पर सिपाही मनोज भार्गव को पकड़ा उसी समय चौकी इंचार्ज अनंत अमौरिया भी मौजूद थे। टीम ने आनन-फानन में चौकी इंचार्ज को भी गाड़ी में बैठा लिया। सिपाही व चौकी इंचार्ज को पकड़कर सीधे बिनावर थाने में ले गए। पूरे जिले में चर्चा फैल गई कि रिश्वत लेते चौकी इंचार्ज व एक सिपाही पकड़े गए हैं।
करीब दो घंटे बाद जब मुकदमा दर्ज हुआ तब पता चला कि रिश्वत लेते हुए सिर्फ सिपाही मनोज भार्गव ही पकड़ा गया है। चौकी इंचार्ज को शक के आधार पर पकड़ा गया था। एंटी करप्शन टीम की मानें तो पकड़े गए सिपाही के बयानों की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है। इसमें भी उसने चौकी इंचार्ज का नाम नहीं लिया है।