जिला अस्पताल के सेफ हाउस में अलग वार्ड बनाया
सीएचसी और पीएचसी स्थर पर भी रहेंगी टीमें
संक्रामक रोगों का प्रकोप शुरू होने के साथ ही जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। यहां रोज 1500-1800 मरीज पहुंच रहे हैं। ओपीडी में दिन भर मरीजों की लाइन लगी रहती है। सामान्य दिनों में ओपीडी पहुंचने वाले मरीजों की तादाद 700 से 900 के बीच रहती है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में बुखार, पेट संबंधी बीमारियां और वायरल के मरीजों की संख्या ज्यादा है।
वहीं, संक्रामक रोगों का सीजन शुरू होने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग हालात से निपटने की तैयारियों में जुट गया है। जिला स्तर से लेकर सीएचसी और पीएचसी तक टीमों का गठन कर दिया गया है। जिला अस्पताल के सेफ हाउस में अलग से वार्ड भी बना दिया गया है। हालांकि, इस तरह से हर साल तैयारियां की जाती हैं लेकिन इसके बाद भी जिले में संक्रामक रोगों से मौतें होती हैं।
वर्ष 2015 में म्याऊं, सालारपुर, इस्लामनगर ब्लॉकों में करीब 150 लोगों की संक्रामक बीमारियों से दो महीने के अंदर मौतें हुई थीं। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग ने संक्रामक रोगों को गंभीरता से लिया। सीजन शुरू होने से पहले जरूरी दवाइयों का स्टॉक करने के साथ जिले भर में टीमें का गठन किया जाता है। इस पर जिला स्तर पर दो टीमें बनाई गई हैं। इसके साथ ही प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर भी टीमों का गठन कर दिया गया है। सीटों में काम की मॉनीटरिंग शुरू सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा कर रहे हैं। जिला अस्पताल के सेफ हाउस में 20 बेड का एक वार्ड भी बनाया गया है। यहां भी एक टीम तैनात रहेगी।