समाजवादी पेंशन योजना के तहत बैंक खातों में रकम पहुंचते ही लाभार्थियों की पात्रता पर सवाल उठने लगे हैं। नझियाई मोहल्ले की महिलाओं ने शुक्रवार को इसका खुलासा करते वक्त गुस्से का भी इजहार किया। आरोप है कि सूची में ऐसे महिला और पुरुषों के नाम शामिल करा दिए गए हैं, जिनके व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं या फिर उनके घरवाले सरकारी नौकरी करके ‘धन्ना सेठ’ बन गए हैं।
नझियाई मोहल्ले में जुटी महिला-पुरुषों में श्यामादेवी, कुलदीप, गीता, मधु और धनवती की मानें तो उन्होंने समाजवादी पेंशन के लिए आवेदन किया था। सर्वे के दौरान भी उनकी पात्रता पर पालिका कर्मियों ने सवाल नहीं उठाया। सूची बनने के बाद बैंक खातों में रकम नहीं पहुंची, तो पता लगा कि कई ऐसे लोग समाजवादी पेंशन को पात्रता की श्रेणी में आ गए, जो कहीं से भी गरीब नजर नहीं आते। ऐसे लोगों में एक बार्ड मेंबर के बेटे और नगर परिषद कार्यालय में नलकूप चालक और हलवाई की पत्नी भी शामिल है।
बता दें कि समाजवादी पेंशन के आवेदकों की सूचियों का सत्यापन नगर परिषद कर्मियों ने किया था। ऐसे में सवाल ही नहीं उठता कि सत्यापन करने वाला कर्मचारी अपने सहयोगी या फिर वार्ड मेंबर के बेटे के नाम पर आपत्ति करता। पेंशन से वंचित महिलाओं ने वसूली का भी आरोप लगाया है। बताया कि उनके नाम कटवाने में वार्ड मेंबर की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने जिला विकास अधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर सूचियों का एक बार फिर से सत्यापन कराके दोषी पालिका कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की आवाज बुलंद की है।
इंसेट
रोजगार सेवकों की भूमिका पर भी सवाल
उझानी। ब्लॉक क्षेत्र के गांव चौसिंगा की महिलाओं ने पात्रता की श्रेणी में आ जाने के बावजूद बैंक से रुपये निकालते वक्त रोजगार सेवक पर उगाही का आरोप लगाया था। ब्लॉक क्षेत्र के कुछेक अन्य गांवों में भी समाजवादी पेंशन को लेकर खामियों और धांधली में रोजगार सेवकों की भूमिका पर सवाल उठाया जा चुका है।
वर्जन
समाजवादी पेंशन के पात्रों की सूची जिस वक्त तैयार हो रही थीं, तब यह तय नहीं था कि टारगेट निर्धारित होगा, लेकिन बाद में जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से कोटा तय कर दिया गया। चूंकि पात्र अधिक थे, इसलिए सभी के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए। सर्वे के दौरान पात्रता के मानक का पूरा ख्याल रखा गया था।
- ललतेश सक्सेना, अधिशासी अधिकारी, उझानी।