संस्कार भारती की ओर से कृष्ण रूप सज्जा का कार्यक्रम हुआ और भजन संध्या भी आयोजित की गई। इस अवसर पर डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने कहा है कि कृष्ण लीला में वास्तविक प्रेम है। इस अवसर पर बच्चे कन्हाई और बच्चियां राधा का रूप धरकर पहुंचे। पूरा परिसर वृज धाम में बदल गया।
श्रीराम सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. उमा सिंह गौर, डॉ. निशि अवस्थी, सरला देवी, डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी, सुषमा भट्टाचार्य भारतीय संस्कृति को विश्व की सबसे प्रभावी संस्कृति बताया। डॉ. विष्णु प्रकाश मिश्र ने कहा कि कृष्ण भक्ति मानव मन को आकर्षित करने में सफल रही है। विदेशी भी कृष्ण भक्ति से प्रभावित हुए बिना नहीं रहे। कवि कामेश पाठक ने अनन्य प्रेम, भक्ति पर प्रकाश डाला।
दिव्यांशी और युक्ता ग्रोवर ने भजन प्रस्तुत किए। विदुषी ने शंकर का रूप रखकर तांडव नृत्य प्रस्तुत किया। निशिता, स्वाति, अभिषेक, सीप ग्रोवर, आद्या, भव्या रस्तोगी की प्रस्तुतियों पर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए। कला साधिका समिति की महिलाओं ने वाद्य यंत्रों में बधाई गीत प्रस्तुत किए। संस्कार भारती के प्रदेश मंत्री विष्णु प्रकाश मिश्र ने सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। इस अवसर पर शशांक निशंक, अजीत सुभाषित, विष्णु गुप्ता, प्रदीप रायजादा विशाल, अयोध्या प्रसाद गंगवार, डॉ. साधना अग्रवान का योगदान रहा। संचालन डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी तो आभार सुषमा भट्टाचार्य ने किया।