जिले में 500 देशी गायों पर शुरू की गई योजना
गाय की कई नस्लें लुप्त होने के कगार पर हैं। गायों की अन्य नस्लों की तुलना में देशी गायों का दूध ज्यादा शक्तिवर्धक होता है। इतना ही नहीं इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी होती है। भारत में भले ही देशी गायों के प्रति लोगों का रुझान कम हो रहा हो, लेकिन विदेशों में इनकी मांग बढ़ी है। ऐसे में अब केंद्र सरकार की एक योजना के तहत यहां भी देशी गायों की नस्ल में सुधार की मुहिम शुरू की गई है, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा।
स्वदेशी अपनाओ का नारा देने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर इस योजना को अमल में लाया गया। विदेशों में देशी गाय की बढ़ती उपयोगिता को लेकर केंद्र सरकार ने सभी जिलों में देशी गायों की नस्ल में सुधार करके दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का काम शुरू किया है। इसमें हरियाणा, साहीवाल और अवर्णित (दोगली) गायों को रखा गया है। इन गायों को इस्ट्रट सिंक्रोनाइजेशन (मदकाल समकालीकरण) के तहत पहले तो चार बार इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद दो अक्तूबर सुबह, शाम और तीन अक्तूबर को सुबह उच्च क्वालिटी के सीमन से गर्भित किया गया था।
इस बारे में उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि इससे देशी गायों से जो गायें पैदा होंगी, वो अधिक दूध उत्पादित करेंगी। इससे देशी गायों की नस्ल सुधरने से देशी गायों की उपयोगिता को बढ़ावा भी मिलेगा।