उझानी में खेत में कटी पड़ी सरसों की फसल। संवाद
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उझानी। मौसम में अचानक आए बदलाव से सुबह में कहीं बूंदाबांदी तो किसी इलाके में बारिश ने सरसों की फसल काे नुकसान पहुंचाया है। सबसे ज्यादा दिक्कत खेतों में कटी पड़ी फसल को लेकर है। तेज बारिश होने की स्थिति में गहाई से पहले ही दाने सड़ने लगे तो पेराई के दौरान सरसों से तेल भी कम निकलेगा।
करीब 40 फीसदी रकबा में सरसों पककर तैयार हो चुकी है। गहाई हालांकि कुछेक इलाकों में ही शुरू हुई है, लेकिन सही समय बोआई के बाद तैयार फसल की किसान इस सप्ताह कटाई शुरू कर चुके हैं। फिर भी करीब 60 फीसदी रकबा में सरसों पकने में एक-डेढ़ सप्ताह लग सकता है। खेतों में खड़ी फसल को बूंदाबांदी से कोई खास नुकसान नहीं हुआ है।
किसानों में बुटला के ओमकार ने बताया कि बृहस्पतिवार तड़के बूंदाबांदी होने से खेतों में कटी पड़ी सरसों भीग गई है। ऐसे में उसकी गहाई भी तीन-चार दिन तक नहीं हो सकती। अगर फिर बारिश हुई तो फली के अंदर ही दाने सड़ने लगेंगे। इसका सीधा प्रभाव सरसों की गुणवत्ता पर पड़ेगा। भीगने से दाने भी दागदार दिखाई देंगे। फली के अंदर जो दाना सड़ जाता है, पेराई के दौरान उसमें तेल भी कम निकलता है।
बताते हैं कि अच्छी गुणवत्ता की सरसों में प्रति क्विंटल में करीब 40 किलोग्राम तेल निकल आता है। दाने सड़ने के कगार पर पहुंचे तो प्रति क्विंटल 30 किलो तेल निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।
बूंदाबांदी से गेहूं समेत सब्जी की फसलों को होगा फायदा
मौसम के बदले मिजाज के बाद इलाके में बूंदाबांदी का सबसे ज्यादा फायदा गेहूं की फसल को हुआ है। हालांकि इसे सिचाई के अनुरूप नहीं माना जा सकता, लेकिन पिछले दिनों पछुआ हवा की वजह से खेतों में नमी कम होने से फसल जल्दी सूखने लगी थी। बूंदाबांदी ने गेहूं को संजीवनी दे दी है। इसी तरह सब्जी की फसलों में मसूर, चना मटर, टमाटर आदि का भी फायदा मिला है। सब्जी उत्पादकों में रामपाल ने बताया कि जिन खेतों में आलू की खोदाई शुरू हो चुकी है, वह बूंदाबांदी के दौरान प्रभावित हुई है।