ईंट-भट्ठों पर स्वच्छता प्रमाण पत्र की वैद्यता लागू किए जाने से ईंट निर्माता संघ ने ऐतराज जताया है। उन्होंने प्रमाण पत्र की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाया। केंद्र सरकार की नई नीति को अव्यवहारिक बताते हुए भट्ठा मालिकों ने ऐसे रद्द किए जाने की वकालत की है।
ईंट-भट्ठा निर्माता संघ की बैठक बुधवार शाम यहां भगवान दास पैलेस में हुई। जिलाध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार की स्वच्छता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता से जुड़ी नीति को गलत करार दिया। बोले-केंद्र सरकार ऐसे समय में प्रमाण पत्र लेने पर जोर दे रही जब उसकी भूमिका पर ही सवाल उठ रहा है। सरकार ने स्वच्छता प्रमाण पत्र लेने के लिए राष्ट्रीयहरित प्राधिकरण को अधिकृत किया है। प्रमाण पत्र लेने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि कोई भी भट्ठा मालिक चाहकर भी प्रमाण पत्र हासिल नहीं कर सकता। नई नीति से ईंट-भट्ठों का संचालित रखना भी मुश्किल हो जाएगा। मालिकानों की मानें तो प्राधिकरण एक बार बैठक करके महज एक दर्जन से अधिक ईंट-भट्ठों को स्वच्छता प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकता।
पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार को अपना निर्णय वापस लेना पड़ेगा। सरकार ने ऐसा नहीं किया तो आने वाले सीजन में उत्तर प्रदेश ईंट-भट्ठा निर्माता समिति लखनऊ और अखिल भारतीय ब्रिक एंड टाईल मैन्यूफैक्चरिंग फेडरेशन के नेतृत्व में उत्पादन ठप कर ईंट-भट्ठों को बंद कर दिया जाएगा। बैठक में अंबेश अनुग्रह सिंह, भुवनेश कुमार माहेश्वरी, दयाशंकर, संजीव कुमार, मनीष कुमार, कृष्ण गोपाल, रत्नेश अग्रवाल और मुनेंद्र कुमार आदि मौजूद थे।