नगर के वार्ड नंबर नौ निवासी सेवानिवृत शिक्षक प्रकाश चंद्र गुप्ता 68 वर्ष कुछ दिनों से बीमार थे। उनकी पत्नी सावित्री देवी को भी बुखार आ रहा था। उनका एक प्राइवेट डॉक्टर के यहां इलाज चल रहा था। गुरुवार की शाम प्रकाश चंद्र गुप्ता की हालत अचानक बिगड़ गई। अपनी तबियत की परवाह किए बगैर सावित्री पति को लेकर बरेली चल दीं। लेकिन रास्ते में सावित्री ने ही दम तोड़ दिया। साथ गए लोग उनको घर ले आए।
शुक्रवार की सुबह सावित्री का अंतिम संस्कार किया जा रहा था, तभी प्रकाश चंद्र गुप्ता असहज हो गए। नगर में एक साथ हुई दो मौत से हर कोई हतप्रभ था। अभी पत्नी की चिता की आग ठंडी नहीं हो पाई थी कि पति की भी लाश श्मशान घाट ले जाई गई। पत्नी की चिता की बगल में ही प्रकाश चंद्र का अंतिम संस्कार किया गया। बुजुर्ग दंपति की मौत की पूरे नगर में चर्चा रही। कोई उनके अटूट प्रेम की बात कर रहा था, तो कोई सावित्री के सुहागन रूप में संसार से अलविदा करने की। उनके दो शादीशुदा बेटे बबलू और रिंकू गमजदा हैं। एक साथ मां-बाप का साया उठ जाने से दोनों ही व्यथित हैं।