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‘आश्वासन से कैसे भरें छात्राओं का पेट’

Sat, 09 May 2015 07:13 PM IST
badaun
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करीब डेढ़ साल पहले कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में जो खाद्यान्न संकट आया था, वह स्थिति दोबारा बनती जा रही है। शुक्रवार को यह मुद्दा बा स्कूलों की वार्डनों ने उठाया। बैठक में उपस्थित वार्डनों ने कहा कि उनके यहां खाद्यान्न खत्म हो गया है। अपने पास से खरीदकर छात्राओं को खिलाया जा रहा है। जो ज्यादा दिन तक नहीं चल सकता है। इस पर बालिका शिक्षा की ओर से खाद्यान्न जल्द भेजे जाने के आश्वासन पर भी वार्डन बिफर गईं। बोली, आखिर आश्वासन से छात्राओं को वह कैसे पेट भरें।
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सर्व शिक्षा अभियान के सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी राजीव वार्ष्णेय के समय पर भी ऐसा ही मामला सामने आया था। पेमेंट न होने की स्थिति में सप्लायर ने स्कूलों में सप्लाई भेजनी बंद कर दी तो खाने के लाले पड़ गए। स्थिति इतनी खराब हो गई कि छात्राओं को विवशता पूर्ण घर जाना पड़ा। वहीं सड़क पर उतरकर छात्राओं और वार्डनों ने हंगामा काटते हुए डीएम से शिकायतें कीं। इसके बाद स्थिति को नियंत्रण किया गया। जांच कमेटी बैठाकर जांच हुई तो कई हकीकत सामने आईं। इसमें डबल एओ पर गाज भी गिरी। उनका तबादला कर दिया। यहीं स्थिति पुन: बनने लगी है। बा स्कूलों में एक बार फिर खाद्यान्न संकट होने लगा है। आरोप है कि डीसी बालिका शिक्षा भेजी गई डिमांड में कटौती करती हैं और सप्लायर कटौती के अनुसार ही खाद्यान्न भेज रहा है। शुक्रवार को हुई बैठक में भी यह मामला उठाया गया। यहां कई देर तक बहस भी चलती रही। डीसी ने आश्वासन दिया कि उनकी डिमांड नहीं काटी जाएगी और जल्द ही खाद्यान्न भेज दिया जाएगा। वार्डनों ने कहा कि अगर खाद्यान्न नहीं पहुुंचा तो खाने के संकट पैदा हो जाएगा। मजबूरन छात्राओं को घर भेजना होगा। डीसी बालिका सीमा चौहान ने बताया कि बैठक में कुछ खास नहीं रहा। खाद्यान्न भेजा जा रहा है। कोई कटौती नहीं की जा रही है। मानक के अनुसार भेजा जा रहा है। जल्द ही खाद्यान्न भेजा जाएगा। बता दें कि बा स्कूलों की वार्डनों की बैठक शैक्षिक गुणवत्ता को लेकर बुलाई गई थी। साथ में डीसी बालिका शिक्षा ने भी बैठक ले ली गई।
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