बरसात और ओलावृष्टि से किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हो चुकी है। केंद्र्र और राज्य सरकार पीड़ित किसानों के आंसू पोछने को सर्वे कराकर उन्हें मुआवजा भी दे रहा है या फिर देने की कार्रवाई चल रही है। किसानों को मुआवजा मिलेगा इसमें भी कई तरह के पेच हैं। सवाल उठ रहा है कि प्रशासन मुआवजा किसको देगा खेत का मालिक या पेशगी पर उसके खेत को जोत रहे किसान को? अगर खेत स्वामी को मुआवजा मिलेगा तो झगड़े होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
तहसील क्षेत्र में कई परेशान किसानों ने सुसाइड करके मौत को गले लगा लिया। राज्य सरकार की ओर से तमाम किसानों को सर्वे के बाद मुआवजा राशि दे दी गई है। केंद्र्र की टीम भी गांव-गांव पहुंचकर सर्वे कर रही है। मुआवजा का कौन असली हकदार है? यह प्रशासन के लिए एक चुनौती पूर्ण कार्य से कम नहीं है। देहात क्षेत्र में बहुत से किसान अपनी जमीन पर पेशगी पर उठा देते हैं। तहसील दातागंज क्षेत्र में ऐसे किसानों की संख्या 25-30 प्रतिशत तक होगी। खेत का मालिक पेशगी की धनराशि पहले ही ले लेता है। पेशगी पर खेतीबाड़ी करने वाले किसान को ही फसल पर अपनी लागत लगानी होती है। क्षेत्र के ऐसे कई किसानों ने बताया कि उन्होंने ढाई से तीन हजार रुपये प्रति बीघा की फसल पर खर्च किए हैं किंतु फसल नष्ट होने से अब कुछ नहीं मिल पा रहा है। पेशगी पर जमीन लेने के बाद वह तो और भी ज्यादा परेशानी में आ गए हैं। चूंकि जब भी कभी किसी चीज का सर्वे होता है, तब उसका लाभ मालिक को ही मिलता है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है जब पेशगी पर जमीन लेने के बाद संबंधित किसान ही फसल पर लागत लगाता है, तो जब कभी दैवीय आपदा आती है तो पेशगी कर रहे किसान को ही उसका लाभ मिलना चाहिए किंतु खेत मालिक का ही सर्वे में जिक्र किया जाता है। लोग कह रहे हैं कि यदि खेत मालिक को मुआवजा मिलेगा तो झगड़े की नौबत भी आ सकती है। या फिर कोई समझदार किसान ही पेशगी पर कर रहे किसान के दर्द को समझते हुए मुआवजे की राशि दे सकता है।
किसानों का दर्द उन्हीं की जुबानी-
तहसील क्षेत्र के गांव करनपुर निवासी बड़े किसान श्यामपाल सिंह ने कहा कि उन्होंने करीब आठ-दस बीघा जमीन में सरसों की थी, जो नष्ट होने के कारण 20 किलो प्रति बीघा ही मिल सकी। लागत भी नहीं निकल पाई।
गांव हजरतपुर निवासी किसान रामशंकर गुप्ता ने कहा कि गेहूं की फसल नष्ट होने के कारण अब मात्र डेढ़ से दो क्विंटल प्रति बीघा ही गेहूं निकल रहा है। जो फसल नीचे बिछ गई थी, उसे तो कटवाया भी नहीं गया है। न ही उसे कटवाने से कोई लाभ है। बहुत से किसान यहीं सोचकर नहीं कटवा रहे हैं कि यह खाद के काम आ जाएगा।
गांव तालिमगंज निवासी महेंद्र्र सिंह और नगरिया खनू निवासी किसान अरुण कुमार सिंह कहते हैं कि इस बार तो ज्यादातर किसान तबाह हुए हैं। मझले किसानों ने तो उधार लेकर खेतीबाड़ी की थी।
...भूसे की रहेगी कमी
खेतों में खड़ी गेहूं की फसल के बरसात से नष्ट होने के बाद किसान के सामने इस बार भूसे की भी समस्या उत्पन्न हो रही है। कई किसानों ने बताया कि बिछ चुकी फसल को कटवाने से कोई फायदा नहीं है। कारण वह गल गया है या फिर साथ में मिट्टी आ रही है। लिहाजा,किसान उस फसल को नहीं कटवा रहे हैं। इस वजह से इस साल भूसे की बेहद समस्या रहेगी। तब जानवरों को भरपेट चारा मिल पाएगा यह कहना मुश्किल है।