जिला महिला अस्पताल के सिस्टम की लापरवाही ने एक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की जान ले ली। प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को भर्ती करने में इतनी देरी की गई कि उसकी इलाज के अभाव में मौत हो गई। यही नहीं उसके गर्भस्थ शिशु की भी आंखें दुनियां में खुलने से पहले गर्भ में ही बंद हो गईं। घरवालों ने डॉक्टर पर मरीज को भर्ती करने में देरी करते हुए इलाज न मिलने की वजह से ही महिला की मौत का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इस पर अस्पताल पहुंची पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए अस्पताल प्रशासन की तरफदारी करते हुए भड़के घरवालों को समझा बुझाकर मामला शांत करा दिया।
थाना बिल्सी क्षेत्र के गांव मिर्जापुर सोहरा निवासी मुजब्बिर की 29 वर्षीय गर्भवती पत्नी निशात को शनिवार सुबह प्रसव पीड़ा हुई। पीड़ा बढ़ने पर मुजब्बिर पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे निशात को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचा। परिवार वालों ने निशात को वाहन से उतारकर खुद अस्पताल के स्टेचर से इमरजेंसी के गेट तक पहुंचाया, लेकिन उसे देखना तो दूर कोई भर्ती करने वाला तक नहीं था। घरवाले इधर उधर ही चक्कर काटते रहे और इलाज न मिलने की वजह से निशात ने कुछ देर बाद ही इमरजेंसी में दम तोड़ दिया। उसके साथ ही उसके गर्भस्थ शिशु की भी मौत हो गई। मुजब्बिर का कहना था कि निशात को अस्पताल के डॉक्टर ने भर्ती तक नहीं किया। लापरवाही की वजह से ही उसकी पत्नी को इलाज नहीं मिल सका और उसकी मौत हो गई। यही बात मुजब्बिर के साथ आए परिवार वालों ने भी कही और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। आधे घंटे तक हंगामा चला। मामला तूल पकड़ता देख अस्पताल वालों ने पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने भी कार्रवाई करने की बजाए पीड़ित पक्ष पर ही शांत होने का दबाव बनाया। इस पर घरवाले शांत हो गए और चुपचाप महिला का शव लेकर अपने गांव चले गए।
अस्पताल तक लाने से पहले ही प्रसूता की मौत हो चुकी थी। इसलिए उसे भर्ती नहीं किया गया। इलाज में लापरवाही का आरोप गलत है।
- डॉ.हाकिम सिंह
महिला की मौत के बाद अस्पताल में हंगामे की सूचना पर पुलिस गई थी। परिवार वालों को समझा कर मामला शांत करा दिया गया। कोई लिखित शिकायत नहीं मिली। अगर शिकायत आएगी तो कार्रवाई की जाएगी।
इंस्पेक्टर कोतवाली