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मुंबई से डीसीएम में लादकर लाए गए 60 मजदूर.. होम क्वारंटीन

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बदायूं। लॉकडाउन में केंद्र सरकार गैर प्रांतों में फंसे मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए बस और ट्रेन की सुविधा मुहैया करा रही है। वहीं इलाके में सक्रिय कुछ दलाल लॉकडाउन का जमकर फायदा उठा रहे हैं। मजदूरों को गैर प्रांतों से लाने के लिए उनसे मोटी रकम वसूल रहे हैं। मंगलवार तड़के मुंबई से एक डीसीएम में लादकर करीब 60 मजदूरों को लाया गया। गनीमत रही कि पुलिस उन्हें कासगंज सीमा पर रोक लिया। फिर स्वास्थ्य विभाग की टीम बुलाकर थर्मल स्क्रीनिंग कराई। इसके बाद सभी को घरों में क्वारंटीन किया गया।
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लॉकडाउन लगने के बाद से ही कादरचौक इलाके में बाहर से लौटने वालों का सिलसिला जारी है। अब तक सैकड़ों लोग पैदल चलकर अपने घर पहुंच चुके हैं। इसके बावजूद बाहर से लौटने वालों की संख्या में कमी नहीं आ रही है। लॉकडाउन की शुरुआत में सरकार ने खाद आपूर्ति के लिए सिर्फ लोडर वाहनों को आने-जाने की अनुमति दी थी लेकिन इलाके में लोडर वाहनों का सवारी ढोने में भरपूर प्रयोग किया गया। अब तक दो बार डीसीएम में क्रेटों में छिपाकर मजदूरों को बाहर से लाया जा चुका है। मंगलवार सुबह मजदूरों की एक और खेप बाहर से लाई गई। बताते हैं कि डीसीएम में करीब 60 मजदूर सवार थे। सभी मजदूरी मुंबई में मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन लगने से सभी मुंबई के अलग-अलग इलाकों में फंस गए थे। इससे उन्हें डीसीएम में बैठाकर ऊपर से त्रिपाल डाल बदायूं लाया गया। जैसे ही ये डीसीएम कासगंज-बदायूं सीमा पर पहुंची कि वहां तैनात पुलिस ने त्रिपाल से झांकते कुछ मजदूरों को देख लिया। इससे पुलिस ने सीमा पर ही डीसीएम को रुकवा लिया। उसके बाद पुलिस ने स्वास्थ्य केंद्र से एक टीम बुलाकर सभी की थर्मल स्क्रीनिंग कराई। जानकारी लेने पर पता चला कि ये मजदूर बेहटा डंबर नगर, सैदपुर, जगत और सखानू के रहने वाले हैं। पुलिस ने डीसीएम चालक के खिलाफ कोई कार्रवाई तो नहीं की है लेकिन उसकी डीसीएम से मजदूरों को उनके घर भेज दिया है।
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एमओआईसी अवधेश राठौर के साथ सभी श्रमिकों की स्क्रीनिंग कराई की गई। इसके सभी होम क्वांरटीन कर दिया गया। - एसओ इंद्रेश, कादरचौक
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