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Budaun News: होली पर बने पकवान अब सेहत पर पड़ रहे भारी

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जिला अस्पताल के आर्थों वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद
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बदायूं। होली पर लोगों ने जमकर पकवानों का स्वाद लिया, लेकिन अब वही पकवान कई लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहे हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थों, तली-भुनी चीजों और मौसम में अचानक बदलाव के कारण जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 1200 मरीज पहुंचे, जिनमें पेट दर्द, उल्टी-दस्त, बदहजमी और आंखों में जलन की शिकायत वाले मरीज अधिक रहे।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अलंकार सोलंकी ने बताया कि होली पर लोगों ने गुझिया, नमकीन, ठंडाई, मिठाई और अन्य तली-भुनी चीजों का ज्यादा सेवन किया। कई जगहों पर मिलावटी मावा और खराब तेल से बने पकवान भी खाए गए। इसके कारण लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं होने लगीं। इस समस्या से पीड़ित करीब 350 मरीज ओपीडी में पहुंचे। इसके अलावा डायरिया और उल्टी-दस्त से पीड़ित करीब 20 मरीज पहुंचे।
वरिष्ठ डाॅ. आरके वर्मा के अनुसार, कई लोग त्योहार के दौरान खान-पान पर नियंत्रण नहीं रख पाते। एक साथ ज्यादा मीठा और तला हुआ खाना खा लेते हैं। इससे पेट में गैस, एसिडिटी और अपच की समस्या हो जाती है। कुछ मरीजों को तेज पेट दर्द और उल्टी-दस्त की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचना पड़ा। ऐसे मरीजों को ओआरएस घोल पीने, उबला या साफ पानी पीने और बाहर के खाने से परहेज करने की सलाह दी गई है।
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आंखों में गिरा रंग, हो रही लाल
जिला अस्पताल में तैनात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष मोहन अग्रवाल का कहना है कि होली के दौरान लोग रंग खेलते समय सावधानियों पर ध्यान नहीं देते। इससे आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई लोग केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल करते हैं, जो आंखों के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं। शुक्रवार को जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में करीब 180 मरीज पहुंचे, जिनमें से 40 से 50 मरीज ऐसे थे जिन्हें आंखों में रंग जाने, जलन, खुजली और लालिमा की शिकायत थी। डॉक्टर ने सलाह देने के साथ ही दवाई भी दी। साथ ही कहा कि आंख में कुछ चला जाए तो उसके मसलना नहीं चाहिए। बल्कि साफ पानी से आंखों को धोना चाहिए।

रंग खेलने से त्वचा में हुई एलर्जी
जिला अस्पताल में तैनात चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीपाल ने बताया कि होली पर इस्तेमाल किए गए रंगों के कारण कई लोगों को त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को चर्म रोग विभाग में करीब 150 मरीजों का उपचार किया गया। इनमें अधिकांश मरीज ऐसे थे, जिन्हें रंग खेलने के बाद त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, जलन और एलर्जी की शिकायत के पहुंचे। डॉक्टर का कहना है कि बाजार में मिलने वाले कई रंगों में केमिकल की मात्रा अधिक होती है, जो त्वचा को नुकसान पहुंचती है। उन्होंने मरीजों को दवाएं दी। साथ ही अभी तेज धूप में निकलने से परहेज बताया।

किसी का टूटा हाथ, किसी का पैर
हड्डी विभाग में 25 से अधिक लोग भर्ती मिले। यहां किसी का हाथ टूटा मिला तो किसी का पैर। परिवार के लोग अब उनकी खिदमत में अस्पताल में रह रहे हैं। परिजनों ने बताया कि झगड़े में चोट आई है। तो किसी ने कहा कि बाइक से बाइक टकरा गई और बेटा घायल हो गया।

सामान्य दिनों की अपेक्षा शुक्रवार को भीड़ अधिक रही। ऐसे में तय समय के बाद भी अस्पताल में मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं। -अमित वार्ष्णेय, सीएमएस, जिला अस्पताल

जिला अस्पताल के आर्थों वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद

जिला अस्पताल के आर्थों वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद

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