- दिन का अधिकतम तापमान बढ़कर 33 डिग्री तक पहुंचा
- रात के अधिकतम तापमान में भी दो डिग्री का इजाफा
ग्लोबल वार्मिंग का असर अभी से ज्यादा गर्मी के रूप में सामने आने लगा है। मई-जून तो अभी दूर हैं, मार्च के महीने में ही गर्मी रिकार्ड तोड़ने लगी है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि इस वर्ष रिकार्ड गर्मी पड़ेगी। मार्च में ही गर्मी के तेवर साफ कर रहे हैं कि मई-जून के महीने में लोगों को भीषण गर्मी का सामना करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के चलते गर्मी के सीजन की अवधि और तापमान हर वर्ष बढ़ता जा रहा है।
शनिवार को रात के तापमान में आंशिक कमी रही, लेकिन रविवार को दिन का तापमान बढ़कर 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। शनिवार को न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो शनिवार को बढ़कर 22 डिग्री सेल्सियस हो गया। मौसम वैज्ञानिकों ने अगले तीन-चार दिनों में पारा 37-38 डिग्री सेल्सियस के पार जाने के आसार जताए हैं। पिछले तीन चार दिनों से तापमान में अचानक बढ़ोतरी हई है। उझानी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की मौसम वेधशाला में 23, 24 और 25 मार्च का औसत अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस अधिक है। मार्च माह के पिछले सालों के इन्हीं दिनों के अधिकतम तापमान पर नजर डालें तो 2010 के बाद पहला मौका है जब तापमान में इतनी बढ़ोतरी हुई है।
- मौसम वैज्ञानिक की राय
यह ग्लोबल वार्मिंग का असर है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। इसका सीधा असर वातावरण पर दिख रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ही तापमान और गर्मी के सीजन का समय बढ़ रहा है। इससे पहले 2002 में 24 मार्च का न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस आंका गया था। मौसम के मिजाज को देखते हुए अगले चार-पांच तापमान में गिरावट के आसार नहीं हैं।
-डॉ. आलोक सागर गौतम, वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक
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- डॉक्टर की राय
बदलते मौसम के मिजाज की वजह से बीमारियां भी बढ़ेंगी। अचानक मौसम में आए बदलाव की ही वजह है कि जिला अस्पताल में रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इस मौसम में साफ-सफाई के साथ खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। सबसे ज्यादा पेयजल की शुद्धता पर ध्यान देने की जरूरत है।
-डॉ. राजेश वर्मा, इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर- जिला अस्पताल